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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस – भारत का प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल

May 12, 2017


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से “सभी लोगों को, विशेष रूप से हमारे मेहनती वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी के विद्वान लोगों को, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर बधाई।”

यह इस लिये कहा गया है क्योंकि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर भारत के लोगों को बधाई दी है। मोदी के कई ट्वीट्स इस बात को बताते हैं कि उन्होंने वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की और 1998 के पोखरण परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा होने पर राजनीतिक नेताओं के साहस की प्रशंसा भी की।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का इतिहास

11 मई, 1998 आधुनिक भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख थी। इस दिन, भारत ने राजस्थान के पोखरण में स्वदेशी तौर पर निर्मित शक्ति-ए परमाणु मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। उसके कुछ दिन बाद 13 मई को, पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम (डीआरडीओ के तत्कालीन प्रमुख) और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष आर चिदंबरम तथा वैज्ञानिकों की एक टीम की बदौलत भारत ने दो और परमाणु हथियारों का सफल परीक्षण किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भारत को एक परमाणु सक्षम देश बताया और इन सफल परीक्षणों के कारण भारत “परमाणु क्लब” में शामिल होने वाला दुनिया का छठा देश बन गया।

यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए एक अवसर का दिन था। जब तीव्र प्रतिक्रिया वाली त्रिशूल, लघु दूरी वाली एसएएम (सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) मिसाइल- भारत की एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम का हिस्सा, का अंतिम परीक्षण सफलतापूर्वक उसी दिन किया गया। अगले साल त्रिशूल को भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। एक बार फिर, भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी योग्यता से देश को गौरान्वित कर दिया।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2017

इतना ही नही उसी दिन, भारत के पहले स्वदेशी विमान हंसा -3 को पहली बार बेंगलुरु में उड़ाया गया था। इस हल्के, दो सीट वाले बहुउद्देश्यीय विमान की संरचना राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (एनएएल), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक इकाई, द्वारा किया गया था, जो तनेजा एयरोस्पेस और एविएशन लिमिटेड के साथ सहयोग कर रहा था।

भारतीय वैज्ञानिकों की तीन आश्चर्यजनक उपलब्धियों और प्रत्येक परीक्षण में प्रदर्शित प्रौद्योगिकी की सफलता का स्मरण करने के लिए, 1999 में प्रधानमंत्री बाजपेयी जी ने घोषणा की कि 11 मई को एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

भारत का प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) राष्ट्रीय समारोहों की देखरेख करता है और वर्ष भर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी दिवस के लिए एक विषय का निर्धारण भी करता है। 2017 के लिये राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के लिए चुना गया विषय “समावेशी और सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी” है, टीडीबी इस दिन असाधारण वैज्ञानिक और तकनीकीय उपलब्धियों का पुरस्कार भी देता है। इस समारोह में विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकि शोध संगठन पूरे देश में जश्न मनाते हैं।

भारत का प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल

भारत ने दुनिया के इतिहास में कुछ बेहतरीन वैज्ञानिक दिमाग का निर्माण किया है। हम यह भी कह सकते हैं कि प्रौद्योगिकी एक राष्ट्रीय जज़्बा है। यह स्वदेशी परमाणु क्षमताओं का निर्माण करके या हमारे अपने तेज लड़ाकू विमान तेजस का निर्माण करके भारतीय वैज्ञानिकों ने यह दर्शाया है कि हमारी रक्षा प्रौद्योगिकी किसी से पीछे नहीं है। रक्षा से लेकर अंतरिक्ष अन्वेषण तक, हम चन्द्रयान-1 की सफलता की भी जाँच कर सकते हैं, यह एक अंतरिक्ष की जाँच है जो 2008 में चाँद की कक्षा तक पहुँच गई थी और जिसने इसरो, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी को एक ही मंच पर रख दिया था। और फिर मंगलायान जो उत्साही वैज्ञानिकों द्वारा संचालित कम लागत, अत्याधुनिक तकनीक का एक शानदार उदाहरण है। 1991 में भारत में स्वदेशी तौर पर बनाया गया अपना पहला सुपर कंप्यूटर परम -800 बनाया जिसने सुपरकम्प्यूटिंग की दुनिया में बड़े पैमाने पर प्रगति की। लाखों भारतीय अब तकनीकि की समझ रखते हैं और भारत कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफ़ोन के लिए सबसे बड़ा बाजार है। भारतीय मूल के नागरिकों का तकनीशियनों के रूप में सिलिकन वैली में जनसंख्या का काफी प्रतिशत है। दुनिया अभी भी तकनीकी सफलताओं और समाधानों के लिए भारत से सम्बन्ध बना रही है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, हमारे युवा और पुरानी प्रौद्योगिकी की अद्भुत दुनिया का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करने का और दुनिया में वैज्ञानिक विकास और तकनीकि की नई पद्धति के नेतृत्वकर्ता के रूप में अपना उचित स्थान लेने के लिए एक उत्तम अवसर है। भारत ने सात दशक पहले भाग्य के साथ अपना प्रयास रखा, अब यह हमारे देश के लिए प्रौद्योगिकी के साथ अपने प्रयास को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण समय है।