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पेमेंट बैंक: बैंकिंग क्षेत्र में एक क्रांति

July 21, 2017


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payment-bank-hindiभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारत में बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को विस्तारित करने के लिए और केंद्र सरकार के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रणनीतिक कदम उठाया है। आरबीआई ने 11 बैंको को पेमेंट बैंक के रूप में स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। पेमेंट बैंक खासकर कम आय वाले और छोटे व्यवसायों वाले समूहों को बैंक की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य रखते हैं। आइए देखते हैं कि बैंकिंग के क्षेत्र में यह क्रांति क्या है तथा यह भारतीय आबादी और वित्तीय बाजारों को कैसे अपनी सेवा प्रदान करेगा।

पेमेंट बैंक क्या है?

आसान शब्दों में कहें तो आमतौर पर यह एक अपूर्ण सेवा वाली तथा जीवन और रोजगार में एक आरामदायक स्थिति उत्पन्न करने वाली बैंक है। यह एक विशिष्ट बैंक है, जो वर्ष 1949 के बैंकिंग विनियमन अधिनियम के आधार पर केवल सीमित बैंकिंग कार्यों को ही संचालित करेगी। पेमेंट बैंक के रूप में लाइसेंस प्राप्त संस्थाएं ही केवल जमा और भेजे गए धन का प्रस्ताव प्राप्त कर सकती हैं। पेमेंट बैंक उधार गतिविधियों को जारी नहीं कर सकते हैं। पेमेंट बैंक बैंकिंग कार्यों जैसे भुगतान, जमा, प्रेषण (धन भेजना) और इंटरनेट बैंकिंग आदि की पेशकश कर सकते हैं, शुरू में उन्हें अधिकतम 1 लाख रुपए प्रति व्यक्ति की नकदी जमा करने की अनुमति दी जाएगी।

पेमेंट बैंको के उद्देश्य?

पेमेंट बैंकों का मुख्य उद्देश्य कम आय वाले परिवारों, प्रवासी श्रमिक कर्मचारियों, छोटे व्यवसायों और अन्य असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं तथा अन्य समान उपयोगकर्ताओं के लिए छोटे बचत खातों और लेन-देन सेवाओं की पेशकश करके वित्तीय समावेशन में वृद्धि करना है। पेमेंट बैंक एक प्रौद्योगिकी आधारित परिवेश में जमा और भुगतान या प्रेषण सेवाओं में उच्च या कम मूल्यों का लेन-देन करने में सक्षम होगा।

क्या कर सकते हैं और क्या नहीं?

पेमेंट बैंक कुछ काम कर सकती है और कुछ नहीं कर सकती, जो इस प्रकार हैं-

यह कर सकती है यह नहीं कर सकती है
  • व्यक्तियों, लघु व्यवसायों या अन्य संस्थाओं से जमा की माँगों को स्वीकार करना।
  • 1 लाख रुपये की सीमा तक नकदी जमा करना (यह बाद में बैंक के प्रदर्शन के आधार पर आरबीआई द्वारा उपयोग में लिया जा सकता है)।
  • शाखाएं, एटीएम और देश के अन्य हिस्सों में पहुँच स्थापित करना।
  • डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग सुविधा प्रदान करना।
  • म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन का विक्रय (लागू करना)।
  • कई बैंकों को भेजे जाने वाले प्रेषण स्वीकार करना तथा उनसे प्रेषण प्राप्त करना।
  • यूटिलिटी बिल के भुगतानों को स्वीकार करना।
  • ऋण देना।
  • क्रेडिट कार्ड जारी करना।
  • एनआरआई (विदेशों से आने वाला पैसा) जमा, स्वीकार करना।
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाओं के लिए सहायक कंपनियों की स्थापना करना।
  • प्रमोटरों को वित्तीय या गैर-वित्तीय सेवाओं की पेशकश करना।

पेमेंट बैंको की स्थापना

  • 23 सितंबर 2013 को, आरबीआई ने नचिकेत मोर के नेतृत्व में लघु व्यवसायों और कम आय वाले घरेलू परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं की एक समिति का गठन किया था।
  • आरबीआई ने 17 जुलाई 2014 को पेमेंट बैंकों के लिए प्रारूप दिशानिर्देश जारी किए थे। आरबीआई ने सुझावों, इच्छुक संस्थाओं और आम जनता की टिप्पणियों (प्रतिक्रियाओँ) को आमंत्रित किया।
  • रिजर्व बैंक द्वारा 27 नवंबर 2014 को पेमेंट बैंकों के लिए अंतिम दिशानिर्देश जारी किए गए थे।
  • आरबीआई ने 4 फरवरी 2015 को पेमेंट बैंकों के लिए आवेदन करने वाली इकाईयों की सूची जारी की है।
  • 28 फरवरी 2015 को वार्षिक बजट की घोषणा के दौरान, यह घोषित किया गया कि भारतीय डाक देश में अपने बड़े नेटवर्क के माध्यम से पेमेंट बैंकों का संचालन करेगा।
  • आरबीआई ने 19 अगस्त 2015 को 11 बैंकों को पेमेंट बैंको की स्थापना को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी।

लाइसेंस किसको मिला?

आरबीआई ने 41 बैंको के आवेदन प्राप्त किये थे जो पेमेंट बैंक के रूप में स्थापित होना चाहती थी, इनमें से 11 बैंकों को लाइसेंस प्रदान किये गये।

  1. आदित्य बिरला नूवो लिमिटेड।
  2. एयरटेल एम कॉमर्स सर्विसेज लिमिटेड।
  3. चोलामंडलम डिस्ट्रीब्यूशन सर्विसेज लिमिटेड।
  4. डाक विभाग।
  5. फिनो पे-टेक लिमिटेड।
  6. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड।
  7. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड।
  8. श्री दिलीप शांतिलाल सांघवी (सन फार्मा के संस्थापक)।
  9. श्री विजय शेखर शर्मा (पेटीएम द्वारा संचालित वन कम्यूनिकेशन्स के सीईओ)।
  10. टेक महिंद्रा लिमिटेड।
  11. वोडाफोन एम-पैसा लिमिटेड।

पेमेंट बैंको की शुरूआत?

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पेमेंट बैंक को दी गई अनुमति 18 माह के लिये मान्य होगी। आवेदकों को इस नियत समय सीमा के भीतर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यकताओं और शर्तों को पूरा करना होगा।

पेमेंट बैंकों के लिए आरबीआई द्वारा निर्धारित दिशानिर्देश?

  • न्यूनतम 100 करोड़ रुपए की पूँजी की आवश्यकता है।
  • पहले पाँच वर्षों के लिए, प्रमोटरों का अंशदान कम से कम 40% होना चाहिए।
  • पाँचवें वर्ष के अंत तक अतिरिक्त हिस्सेदारी को 40% तक, दसवें वर्ष के अंत तक 30% तक और व्यवसाय शुरू होने की तिथि के 12 वर्ष के बाद 26% तक घटाया जा सकता है।
  • भारत में निजी बैंकों में स्थापित एफडीआई के लिए विदेशी हिस्सेदारी पर समान नियम होंगे।
  • बैंकिंग विनियमन, 1949 को मताधिकार को विनियमित करने के लिए जारी किया गया।
  • प्रोमटरों को छोड़कर अन्य संस्थाओं को 10% से अधिक हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • 5% से अधिक के अधिग्रहण के लिए आरबीआई से अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
  • बैंक के निर्देशक मंडल को अधिकांश स्वतंत्र निर्देशक को शामिल करना चाहिए, जिन्हें आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार नियुक्त किया जायेगा। निदेशकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ‘उपयुक्त एवं संगत’ मानदंडों का पालन करना चाहिए।
  • पेमेंट बैंक को पूरी तरह से नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए और शुरूआत से ही उनको टेक्नोलॉजी से संबद्ध होना चाहिए।
  • इसकी 25% शाखाओं को बिना बैंक वाले ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होना चाहिए।
  • उन्हें अपने नाम के रूप में “पेमेंट बैंक” शब्द का उपयोग करना चाहिए, ताकि वह अन्य बैंकों से भिन्न हो सकें।
  • कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पेमेंट बैंकों को पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जाएगा।
  • आरबीआई ने सख्ती से कहा है कि ग्राहकों की शिकायतों और चिंताओं का समाधान करने के लिए बैंकों को एक उच्चस्तरीय ‘ग्राहक शिकायत कक्ष’ स्थापित करने की आवश्यकता होगी।

पेमेंट बैंक मौजूदा बैंकिंग क्षेत्र को कैसे प्रभावित करेगें?

पेमेंट बैंक ग्रामीण क्षेत्रों के उन लोगों तक अपनी बैंकिंग की सुविधायें पहुँचायेंगे जहाँ तक बैंकिंग प्रणाली प्रभावी नहीं है। इस तरह वे सामान्य बैंकिंग के दायरे के तहत बिना खाते वाली जनता को बैंकिंग सेवायें प्रदान करने में मदद करेंगे।  वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि बैंकिग प्रणाली में अधिक पैसा आता है इसलिये वित्तीय समावेशन में भी तेजी आयेगी। यह बैंक आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मजबूत बनाने में काफी मददगार साबित होंगे।

इन नए बैंकों के समूह के आगमन के साथ मौजूदा शीर्ष बैंकें प्रभावित नहीं होगीं क्योंकि पेमेंट बैंक केवल विशिष्ट क्षेत्रों में ही काम करेंगी। साथ ही, भारत के प्रमुख बैंक इन बैंकों को देश के हर हिस्से में अपनी पहुँच को सुधारने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि पेमेंट बैंक व्यवसाय संवाददाताओं के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। वास्तव में, कुछ प्रमुख बैंकों ने पहले ही लाइसेंस धारकों के साथ करार कर लिया है। उदाहरण के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने आरआईएल के प्रस्तावित पेमेंट बैंक के साथ समझौता किया है, इसमें इसकी लगभग 30% हिस्सेदारी होगी। इसी तरह आदित्य बिरला नूवो लिमिटेड ने आइडिया सेल्यूलर के साथ करार कर लिया है जिसका संयुक्त व्यवसाय में 49% हिस्सा होगा। कोटक महिंद्रा बैंक की भारती एयरटेल बैंक में 19.9% ​​की हिस्सेदारी होगी।

ऐसी संभावना है कि टेक महिंद्रा पेमेंट बैंकों के लिए महिंद्रा फाइनेंस के साथ हाथ मिला लेगी। नॉर्वेजियन दूरसंचार कंपनी टेलिनॉर, दिलीप सांघवी और इन्फ्रा फाइनेंसर आईडीएफसी ने पेमेंट बैंक के साथ एक करार किया है।