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कांग्रेस शासन के तहत भारत में घोटाले

July 21, 2018


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कांग्रेस शासन के तहत भारत में घोटाले

कांग्रेस के नेतृत्व में कई मोर्चों पर यूपीए सरकार की आलोचना की जाती है;  इनमें से सबसे अधिक बातें उनके शासन के तहत किए गए घोटालों, भ्रष्टाचारों और रिश्वतखोरी के न खत्म होने वाली सूची के बारे में है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को शिक्षित भारतीयों की सरकार में एक बड़ा हिस्सा देने और भारत के कल्याण के लिए स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय और समेकित भाग लेने के लिए स्थापित किया गया था। लेकिन कब और कैसे ये लक्ष्य सीट वापस ले गए और आत्महित एवं घोटाले कांग्रेस का हिस्सा बन गये, यह चिंता का मुख्य विषय है। इसने 16 वें लोकसभा चुनाव में अपनी ऐतिहासिक हार में योगदान दिया।

कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने दो कार्यकाल पूरे किए लेकिन पार्टी हमेशा किसी न किसी घोटाले की खबर में रही है। प्रत्येक वर्ष के साथ बीते घोटालों के परिणाम हर साल बढ़ते गए। यहाँ यूपीए सरकार के तहत प्रमुख घोटालों की एक संक्षिप्त सूची है-

यूपीए सरकार के तहत बड़े घोटाले

बोफोर्स घोटाला: बोफोर्स घोटाला भारत में घोटालों और भ्रष्टाचार के ट्रेडमार्क जैसा दिखता है। 1980 के दशक में इस घोटाले में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी, हिंदुजा और कई अन्य शक्तिशाली नाम शामिल थे। यह घोटाला भारत को 155 मिमी फील्ड होवित्जर्स के साथ प्रदान करने के लिए एक बोली जीतने के बारे में था। यह घोटाला भारतीय रक्षा और सुरक्षा से संबंधित था, इसलिए बहुत चिंता का विषय था।

2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला (2008):  भारत में सबसे बड़ा घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला था, जिसमें दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर निजी दूरसंचार कंपनियों को 2008 में बहुत सस्ते दरों पर 2 जी लाइसेंस जारी करने का आरोप लगाया गया था। नियमों का पालन नहीं किया गया था, लाइसेंस जारी करते समय केवल पक्षपात किया गया था। इसमें 1.96 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। सरकार ने 2001 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लिए प्रवेश शुल्क रखा था। इसमें दूरसंचार के बारे अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किया गया था। भारत में 2001 में मोबाइल उपभोक्ता 4 मिलियन थे जो 2008 में बढ़ोतरी करके 350 मिलियन तक पहुंच गये।

सत्यम घोटाला (2009): सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुऐ। यह घोटाला कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46% हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (2010): राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और संचालन के लिए लिये लिया गया धन भारी मात्रा में घोटाले में चला गया। इसमें लगभग 70,000  करोड़ रूपये का घोटाला किया गया है। इस घोटाले में कई भारतीय राजनेता नौकरशाह और कंपनियों के बड़े लोग शामिल थे। इस घोटाले के प्रमुख पुणे के निर्वाचन क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि सुरेश कलमाड़ी थे। उस समय, कलमाड़ी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। इसमें शामिल अन्य बड़े लोगों में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री- शीला दीक्षित और रॉबर्ट वाड्रा हैं। इसका गैर-अस्तित्व वाली पार्टियों के लिए भुगतान किया गया, उपकरण की खरीद करते समय कीमतों में तेजी आई और निष्पादन में देरी हुई थी।

कोयला घोटाला (2012): कोयला घोटाले के कारण भारत सरकार को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। सीएजी ने एक रिपोर्ट पेश की और कहा कि 194 कोयला ब्लॉकों की नीलामी में अनियमितताऐं शामिल हैं। सरकार ने 2004 और 2011 के बीच कोयला खदानों की नीलमी नहीं करने का फैसला किया था।   कोयला ब्लॉक अलग-अलग पार्टियों और निजी कंपनियों को बेच दिये गये थे। इस निर्णय से राजस्व में भारी नुकसान हुआ था।

हेलिकॉप्टर घोटाला (2012): यह घोटाला भारत में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जिसमें कई राजनेता, भारतीय वायु सेना के चीफ एयर  मार्शल एसपी त्यागी और हेलिकॉप्टर निर्माता अगस्टा वेस्टलैंड जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। कंपनी ने 610 मिलियन आमेरिकी डॉलर के 12 हेलीकाप्टरों की आपूर्ति में एक अनुबंध पाने के लिए रिश्वत दी थी। इटली की एक अदालत में 15 मार्च 2008 को प्रस्तुत एक नोट यह संकेत करता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी भी घोटाले में शामिल थीं।

टाट्रा ट्रक घोटाला (2012): वेक्ट्रा के अध्यक्ष रवि ऋषिफॉर्मर और सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग प्रतिबंध अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला पंजीकृत किया था। इसमें सेना के लिए 1,676 टाटा ट्रकों की खरीद के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी।

आदर्श घोटाला (2012): इस घोटाले में मुंबई की कोलाबा सोसायटी में 31 मंजिल इमारत में स्थित फ्लैटों को बाजार की कीमतों से कम कीमत पर बेचा गया था। इस सोसायटी को सैनिकों की विधवाओं और भारत के रक्षा मंत्रालय के कर्मियों के लिए बनाया गया था। समय की अवधि में, फ्लैटों के आवंटन के लिए नियम और विनियमन संशोधित किए गए थे। इसमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाये गये थे। यह जमीन रक्षा विभाग की थी और सोसायटी के लिये दी गई थी।

कांग्रेस यूपीए सरकार के तहत घोटालों की सूची बहुत लंबी है और कभी खत्म नहीं होती है। सूची में कुछ और हैं, तेलगी घोटाले, बीमा घोटाला, दूरसंचार घोटाला (सुखराम), चारा घोटाला, केतन पारेख घोटाले, ताज गलियारा मामला, तेल के लिए खाद्य कार्यक्रम घोटाला, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज फ्रॉड, मधु कोडा और मनी लॉन्ड्रिंग 4000 करोड़ रूपये कीमत के आदि शामिल हैं।