Home / / राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय)

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय)

August 28, 2016


Please login to rate
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय) पृष्ठभूमि और उद्देश्य

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय) पृष्ठभूमि और उद्देश्य

इस सहस्त्राब्दी के शुरुआती वर्षों में देश की आबादी तेजी से बढ़ी। उस अनुपात में न तो रोजगार की सुविधाएं बढ़ी और न ही संपत्ति। ऐसे में सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल की मांग ने भी जोर पकड़ा। 2000 के दशक की शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के कुल कार्यबल का 93 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में कार्यरत था। इनमें से ज्यादातर कर्मचारी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करते थे। बीमारियों और अस्पताल के खर्चों ने उन लोगों की थोड़ी-बहुत संपत्ति जो बची थी, उस पर भी हाथ साफ कर दिया। उस दौरान चिकित्सकीय सुविधाओं की प्रचुर उपलब्धता के बाद भी देश में उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल बेहद खर्चीली ही रही।

इस चिंता को दूर करने के लिए, भारत सरकार ने 2008 में असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम लागू किया। इस कानून ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए कल्याण योजनाएं बनाने का जिम्मा भारत सरकार पर डाल दिया। इन कामगारों की जेब के दायरे से बाहर (आउट-ऑफ-पॉकेट यानी ओओपी) जा रहे खर्चों की भरपाई की कोशिश के तौर पर सरकार ने 2008 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय) शुरू की। आरएसबीवाय एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो खास तौर पर गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों के लिए है।

योजना की वेबसाइट पर आरएसबीवाय के मुख्य उद्देश्य यह बताए गए हैः-

भारत ओओपी को घटाकर तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य खर्चों के मुकाबले में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना

गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के साथ ही असंगठित क्षेत्र के अन्य संवेदनशील समूहों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा मुहैया कराने के साथ ही अस्पताल के खर्चों में मदद करना

योजना की शुरुआत और लक्षित हितग्राही

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय) एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य के गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाना है। यह सुविधा सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इंश्योरेंस कवरेज देती है। स्वास्थ्य बीमा की प्रीमियम की लागत केंद्र (75 प्रतिशत) और राज्य (25 प्रतिशत) मिलकर उठाते हैं। शुरुआत में यह योजना श्रम और रोजगार मंत्रालय ने शुरू की थी, लेकिन बाद में 1 अप्रैल 2015 को इस योजना को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को ट्रांसफर कर दिया गया।

एक अप्रैल 2008 को आरएसबीवाय देश के 25 शहरों में शुरू की गई थी। फरवरी 2014 तक कुल 3.6 करोड़ परिवार इस योजना के दायरे में आ गए थे।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाय) की शुरुआती मंशा गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाले परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल और वित्तीय राहत प्रदान करना था। बाद में इस योजना के दायरे में उन परिवारों और कामगारों को भी लाया गया, जो शुरुआत में इसमें नहीं आते थे-

इनमें शामिल हैं-

मनरेगा के वह कर्मचारी, जिन्होंने पिछले वित्त वर्ष में कम से कम 15 दिन काम किया है
घरेलू कामों में सहायक और कर्मचारी
स्वच्छता से जुड़े कर्मचारी
खनिक और खदानों में काम करने वाले मजदूर
रिक्शा खींचने वाले और ऑटो व टैक्सी ड्राइवर
स्ट्रीट वेंडर्स और रेलवे कुली
आरएसबीवाय का विस्तृत विवरण-
2008 में शुरू की गई आरएसबीवाय के मुताबिक-
जिस बीपीएल परिवार के पास वैध राशन कार्ड हो, वह इस योजना के तहत दिए जा रहे बीमा फायदे उठाने के लिए पंजीयन करा सकते हैं;
एक बार रजिस्ट्रेशन के लिए 30 रुपए लिए जाएंगे;
एक परिवार के अधिकतम पांच सदस्यों को इस योजना के तहत लाभ मिल सकता है। इसमें घर का मुखिया, उसका जीवनसाथी और तीन आश्रित लोग (बच्चे या माता-पिता) को बीमा योजना के दायरे में लाया जा सकता है;
हर परिवार अस्पताल में भर्ती मरीज पर हर साल 30,000 रुपए तक का दावा (कैशलेस) कर सकती है;
सिर्फ एम्पैनल किए गए अस्पतालों में भर्ती करने पर ही यह सुविधा मिलेगी;
इस योजना के दायरे में पहले ही दिन से पुरानी बीमारियां भी आएंगी;
हर परिवार किसी सदस्य को अस्पताल में भर्ती करने पर 100 रुपए के परिवहन व्यय का दावा भी कर सकती है। लेकिन एक साल में एक परिवार अधिकतम 1,000 रुपए का ही दावा कर सकेगा।

आरएसबीवाय का कार्यान्वयन

स्कीम शैड्यूल के मुताबिक, हर राज्य में राज्य सरकार को ही स्टेट नोडल एजेंसी (एसएनए) बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नोडल एजेंसी ही इस स्कीम को राज्य में कार्यान्वित करने के लिए जवाबदेह होगी। राज्य स्तर पर, एजेंसी सर्वे करेगी और पात्र परिवारों की सूची तैयार करेगी। यह परिवार मोबाइल एनरोलमेंट स्टेशन पर पहुंचकर फोटोग्राफ्स देकर और बायोमेट्रिक सूचनाएं (फिंगरप्रिंट्स) देकर उसी वक्त स्मार्ट कार्ड हासिल कर सकते हैं।

स्मार्ट कार्ड न केवल हितग्राही के पहचान पत्र का काम करता है, बल्कि यह अस्पतालों में कैशलेस सुविधाएं हासिल करने में भी मददगार होता है। स्कीम की पूरी जानकारी और संबद्ध अस्पतालों की सूची एसएनए स्मार्ट कार्ड्स के साथ ही देगा। केंद्रीय शिकायत एवं जनसमस्या निवारण प्रणाली (सीजीआरएस) इस स्कीम के तहत मिली शिकायतों को हासिल करेगी और उनका निराकरण करेगी।

2012-13 में केंद्रीय बजट में 1,096.7 करोड़ रुपए आरएसबीवाय के लिए आवंटित किए गए थे। यह देश की बीपीएल आबादी को कवरेज में लाने के लिए काफी कम पैसा था। इस वजह से इसकी आलोचना भी हुई थी।

तारीफ और सराहना

देश के सारे बीपीएल परिवारों को योजना के दायरे में लाने में सफल नहीं होने के बाद भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत किए गए कार्यों को नकारा नहीं जा सकता। हालिया खबरों के मुताबिक, आरएसबीवाय के तहत कुल 1.18 करोड़ लोगों का अस्पताल में इलाज किया गया। (31 मार्च 2016 की स्थिति में)

देश के लाखों गरीब लोगों को इस योजना से मिले लाभ की वजह से विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन जैसी संस्थाओं ने योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। जर्मनी ने स्मार्ट कार्ड मॉडल का अध्ययन करने में रुचि दिखाई। वह भी अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में है।

भविष्य की योजनाएं-

इतना ही नहीं, अपने सामाजिक सुरक्षा उद्देश्यों के साथ एनडीए सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की समीक्षा करने की घोषणा की है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आरएसबीवाय के लाभों को उनकी सरकार प्रति परिवार 30,000 रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए प्रति परिवार करने जा रही है। इसका मतलब है कि इस योजना के दायरे में गंभीर बीमारियां भी आ जाएंगी।
इस समय, इस स्कीम के तहत प्रति व्यक्ति औसत बीमा दावा 22,000 रुपए है। एक लाख रुपए की प्रतिबद्धता दिखाना सरकार की ओर से गंभीर प्रयास दिखता है।

प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट ने विभिन्न पक्षों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं, ताकि इस योजना का दायरा बढ़ाया जाए और समूचे बीपीएल समुदाय में लागू किया जा सके।

मोदी द्वारा शुरू किए गए अन्य कार्यक्रम:

भारत में सामाजिक सुरक्षा हेतु अटल पेंशन योजना (एपीवाय)

‘बेटी बचाओ, बेटी पदाओ योजना’

सुकन्या समृद्धि अकाउंटः भारत में लड़कियों के लिए नई योजना

प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाय)

भारत में सामाजिक सुरक्षा हेतु अटल पेंशन योजना (एपीवाय)

2014 में मोदी द्वारा किये गए टॉप पांच कार्यक्रम

प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाय) – एक दुर्घटना बीमा योजना