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ड्रग्स का सेवन : कारण और समाधान

June 28, 2018


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ऐसे कई कारण हैं, कि उपयोगी दवाओं का सेवन नशीली दवाओं के दुरुपयोग में क्यों बदल जाता है? एक बुनियादी स्तर पर ऐसा इसलिए किया जाता है जब संबंधित व्यक्ति को तनाव से मुक्त होने की आवश्यकता होती है या अपने साथियों के साथ क्षणिक एवं  लम्बा समय व्यतीत करना होता है , खासकर युवाओं के मामले में ऐसा पाया गया है। यह प्रवृति जल्द ही एक ऐसी स्थिति में पहुँच जाती है जब व्यक्ति जीवन की अन्य आवश्यकताओं की तुलना में नशे को अधिक महत्व देने लगता है। इससे व्यक्ति को यह विश्वास हो जाता है कि अब उसका जीवन सिर्फ दवाओं पर ही निर्भर है।

टेलीविजन और लोकप्रिय फिल्मों आदि में नशीली दवाओं का सेवन दिखाना, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मुख्य कारणों में से एक है, क्योंकि यह युवाओं को प्रेरित करता है। फिल्मों में नशीली दवाओं के प्रयोग से रोमांटिक होना और उसके कुछ काल्पनिक सकारात्मक पहलुओं को दिखाया जाता है। इस प्रकार यह युवाओं के लिए एक रोमांचकारी और मोहक मामला बन जाता है, जो जीवन में अनुभव की कमी (बचपने) के कारण आसानी से भ्रमित हो सकते हैं। कभी-कभी नशीली दवाओं के सेवन से होने वाले जोखिमों के बारे में जानने के लिये भी लोग इसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। कुछ मामलों में लोग अपने परिवारजनों या सामाजिक परिवेश से नशा करने के लिये प्रेरित होते हैं। इसके कई अन्य कारण हैं जैसे इसे पहले केवल चखने के लिये दिया जाता है जबकि वह जानते हैं कि यह एक लत बन जाएगी।

नशीली दवाओं के दुष्प्रभाव

नशीली दवाओं का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप दवाओं के आदी व्यक्ति के जीवन का हर पहलू प्रभावित हो जाता है। ड्रग्स मुख्य रूप से रसायनिक पदार्थ होते हैं, जो मानव मस्तिष्क की संचार प्रणाली को प्रभावित करता हैं। यह पदार्थ तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क को भेजी गयी प्रक्रियाओं और जानकारियों को प्रभावित करते हैं। यह नशीली दवायें मानव मस्तिष्क में संचार के लिये कार्य करने वाले प्राकृतिक रासायनिक तत्वों की एक कॉपी तैयार करती हैं जो मस्तिष्क की प्रतिक्रिया परिपथ को अधिक उत्तेजित कर देती हैं। रासायनिक संदेश वाहक के रूप में हेरोइन और भांग को इसी प्रकार से बनाया जाता है, जिसे न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में जाना जाता है।

यह न्यूरोट्रांसमीटर्स मानव मस्तिष्क द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पन्न किये जाते हैं। इस समानता के परिणामस्वरूप, दवाएँ मानव मस्तिष्क में ग्रहीता कोशिकाओं को मूर्ख बनाकर तंत्रिका तंत्र को आसामान्य संदेश भेजने के लिये सक्रिय कर सकती हैं। मेथाम्फेटामाइन और कोकीन जैसे ड्रग्स के मामले में, तंत्रिका कोशिकाओं को सक्रिय किया जाता है और फिर वे आसामान्य तरीके से एक बड़ी मात्रा में न्यूरोट्रांसमीटर्स का उत्पादन करते हैं। वे मस्तिष्क को सामान्य तरीके से इन रसायनों की पुनरावृत्ति करने से रोकने में भी सक्षम हैं। तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संचार को समाप्त करने के लिए इनके उत्पादन के एक सामान्य स्तर की आवश्यकता होती है।

यह व्यवधान एक अत्यधिक प्रवर्धित संदेश की अगुवाई में मस्तिष्क के सामान्य संचार तंत्र को बाधित कर देता है। मस्तिष्क की पारितोषिक प्रणाली को लक्षित करने के लिए लगभग सभी दवाओं द्वारा डोपामाइन का उपयोग किया जाता है। डोपामाइन को एक न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसे मस्तिष्क की आंदोलन, प्रेरणा, भावना और आनंद जैसी विभिन्न भावनाओं को नियंत्रित करने वाले क्षेत्र में पाया जा सकता है। इसका प्रमुख उदहारण डिगो माराडोना का है जिन्होंने ड्रग्स के सेवन के कारण अपना वजन 94 किलोग्राम  कर लिया था , हालाँकि फिर कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपना वजन वापस 77 किलोग्राम कर लिया था। फिर उन्होंने टूर्नामेंट में  टीम को अगले दौर में पहुंचाने में प्रमुख योगदान दिए था।

नशीली दवाओं का उपयोग स्वयं उपयोगकर्ता के व्यवहार में कई बार घृणास्पद रूप में प्रकट होता है। इस अनुक्रम में उपयोगकर्ता नशीली दवाओं के दुरुपयोग को दोहराते रहते हैं। जब यह पैटर्न जारी रहता है तो मस्तिष्क अपने डोपामाइन उत्पादन को कम करने के साथ डोपामाइन ग्रहीताओं को कम करके उपयोग के अनुकूल होने की कोशिश करता है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग के माध्यम से उपयोगकर्ता स्वयं को इसके अनुकूल बनाने की कोशिश करता है, ताकि उसके डोपामाइन उत्पादन स्तर को उस स्तर पर वापस लाया जा सके जो उसके लिए सामान्य लगता है।

नशीली दवाओं के दुरुपयोग का समाधान

नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिये रोकथाम इसका सबसे अच्छा उपचार है। वास्तव में इस समस्या से विशेषज्ञों और चिकित्सकों के बताये गये तरीके के अनुसार चलकर आसानी से बचा जा सकता है। इस संबंध में परिवारों, स्कूलों और तत्काल कार्य करने वाले समुदायों और संस्थाओं द्वारा रोकथाम के लिये किये गये कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण हैं। मीडिया, विशेष रूप से मनोरंजन खंड को इस संदर्भ में, जिसमें नशीली दवाओं के दुरुपयोग को बढ़ाना और गौरान्वित करना एवं लाखों लोगों द्वारा मादक द्रव्यों के सेवन के लिये लाखों की कमाई करने का आग्रह करते हुए सकारात्मक कार्य करती है, अपनी भूमिका को समझने की जरूरत है।

नशीली दवाओं के दुरुपयोग से होने वाले घातक परिणामों को उजागर करने की जरूरत है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है, युवाओं को यह महसूस कराया जाये कि उनके लिये नशीली दवाओं का सेवन हर तरह से हानिकारक है, ऐसा करने से वे स्वयं तो इनका उपयोग बंद कर देगें साथ में वे अपने साथियों को भी ऐसा करने से रोकेंगे।

उन लोगों के लिये जो नशे के पूरी तरह से आदी हो चुके हैं, निरंतर उपचार ही एकमात्र विकल्प है। नशीली दवा का दुरूपयोग करने वालों के लिए उपचार आमतौर पर उस दवा की प्रकृति पर निर्भर करता है जिसे वह व्यक्ति उपयोग कर रहा है। ऐसा कहा जाता है कि आमतौर पर इसका सबसे अच्छा उपचार व्यक्ति के जीवन से संबंधित घटनाओं पर ध्यान देकर किया जा सकता है। इसमें चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और कार्य से संबंधित जरूरतों के साथ ही व्यक्ति के जीवन में अन्य लोगों के साथ संबंधों में समस्याएं शामिल हैं। उपचार सत्र में दवाइयाँ और व्यवहारिक चिकित्सा जुड़ी हुई है ताकि नशीली दवाओं के आदी व्यक्ति में नशा करने की इच्छा को धीरे-धीरे रोका जा सके। उपचार के लिये चलाये जा रहे यह कार्यक्रम नशे के आदी व्यक्ति में भविष्य में नशे को ना कहने का कौशल और क्षमता प्रदान करते हैं। यह सभी कार्य नशीली दवाओं के दुरुपयोग का पूरा इलाज करने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

अध्ययन बताते हैं कि दिल्ली की सड़कों के 90% बच्चे ड्रग्स के आदी हैं

सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल दिल्ली के फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों द्वारा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के 46, 410 मामलों की सूचना मिली। पिछले वर्षों के दौरान हेरोइन (840), अफीम (420), फार्मास्युटिकल ओपियोड्स (210) और सीडेटिव (210) ड्रग्स पदार्थों की खपत के मामले सामने आये थे। ये आंकड़े ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के हाल ही के एक अध्ययन पर आधारित थे।

‘सेव द चिल्ड्रन’ एनजीओ ने बताया है कि 2011 में दिल्ली के फुटपाथ पर रहने वाले लगभग 50, 923 बच्चों में से 46,411 बच्चे नशीली दवाओं के आदी थे।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार, 2015 में 53 और 2016 में 34 बच्चों की अप्राकृतिक मृत्यु नशीली दवा का अत्यधिक सेवन करने के कारण हो गई थी, इन बच्चों की उम्र 18 वर्ष से कम थी।

ड्रग दुरुपयोग के खिलाफ लड़ने की पहल

  • हरियाणा सरकार ने नशीली दवाओं का सेवन रोकने के उद्देश्य से ‘शराब और पदार्थ (ड्रग) दुरुपयोग की रोकथाम के लिए सहायता के केंद्रीय क्षेत्र योजना’ नामक एक योजना लागू की है। इस योजना के तहत, योग्य गैर सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों को सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जो बदले में नशे की पुनर्वासन के लिए संपूर्ण सेवाएं प्रदान करेंगे। सरकार द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे बच्चों के बीच मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर रोकथाम के लिए उपाय करें।
  • सामाजिक सुधार और लत-मुक्त करने में लगे चरित्र निर्माण सेवादार ट्रस्ट और एनजीओ ने कहा कि तिहाड़ में लगभग 80 प्रतिशत कैदी तंबाकू, गांजा, स्मैक या अल्कोहल के आदी हैं। इन्होंने सुझाव दिया है कि जेल में कैदियों की निराशा दूर करने के लिए अधिक सलाहकारों की आवश्यकता है, जो इनको इसके दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दे सकें।
  • चेतना एनजीओ (एक गैर सरकारी संगठन) है जो बच्चों के लिए निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन के समीप एक अनौपचारिक मनोरंजन केंद्र चलाता है। ये लोग मुख्य रूप से पुलिस और गली के बच्चों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो दवाओं और अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
  • दिल्ली एड्स कंट्रोल सोसाइटी (डीएसीएस) ने एक योजना का सुझाव दिया है, जिसमें दिल्ली सरकार के 260 औषधालय में काम कर रहे 400 से अधिक चिकित्सा अधिकारी और दिल्ली के 32 अस्पतालों में काम कर रहे 150 विशेषज्ञों को मानव व्यवहार और सहयोगी विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) में दीर्घकालिक आधार पर प्रशिक्षित किया जाएगा क्योंकि नशीली दवाओं का दुरुपयोग करने वाले रोगियों से निपटने के लिए मनोचिकित्सकों और प्रशिक्षित मानव शक्ति की कमी है। उन्होंने औषधालयों में उपलब्ध नशीली दवाओं की बिक्री और खरीद पर सख्त जाँच करने की भी सलाह दी है। 2016 में ऐसी दवाएं बेचने वाली 20 दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दिल्ली जोनल यूनिट ने ड्रग दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटैंस एक्ट, 1985 के अनुसार समान शक्ति रखने वाले पुलिस, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, राजस्व खुफिया निदेशालय जैसे हितधारकों का उपयोग करने का सुझाव दिया है। संस्था ने भी एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64 को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिसमें कहा गया है: “अपनी इच्छा से इलाज कराने वालों के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा यह प्रतिरक्षा प्रदान की गई है कि अगर व्यसन का पूर्ण रूप से इलाज नहीं किया जाता है तो अभियोजन पक्ष द्वारा किया जा रहा इलाज रोका जा सकता है।“

सूचनाः  यह लेख 19 जून 2017 को समुद्रनिल द्वारा लिखा गया है। इस लेख में निहित जानकारी हाल ही में अपडेट की गई है।

 

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नशीली दवाओं का टेलीविजन, लोकप्रिय फिल्मों आदि में  सेवन को दिखाना नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मुख्य कारणों में से एक है, क्योंकि यह युवाओं को प्रेरित करता है।