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मैरी कॉम : कभी भी हार न मानने वाली बॉक्सर और भारतीय नारी!

November 27, 2018


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मैरी कॉम : कभी भी हार न मानने वाली बॉक्सर और भारतीय नारी!

आप के जीवन में आने वाली चुनौतियां ही वास्तविक जीवन है। इसलिए मुक्केबाजी के मामले में, खासकर तब जब एक महिला इसे भारत में चुनती है! यह अभिज्ञता मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम को प्रेरित करती है, जिन्हें एमसी मैरी कॉम के नाम से जाना जाता है और जो खेलने और जीतने के लिए प्रसिद्ध हैं। मैरी कॉम के लिए, यदि आप मजबूत इरादें रखते हैं तो कुछ भी असंभव नहीं है! मैरा कॉम ने मुक्केबाजी की रूपरेखा ही बदल दी है और दुनिया को दिखाया है कि यह केवल पुरूषों का क्षेत्र नही है। मैरी कॉम ने इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया और स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बन गईं।

छह बार विश्व चैंपियन रह चुकी मैरी कॉम का मानना है कि कड़ी मेहनत ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। हां, जीवन में समर्पण करना पड़ता है लेकिन ये समर्पण ऐसी सफलता के लायक है। एथलेटिक्स की ओर से अनिच्छा ने मुक्केबाजी, एक ऐसा खेल जिसमें इन्होंने उत्कृष्टता प्राप्त करके प्रसिद्धि और भाग्य को जीत पाई, के लिए जुनून का मार्ग प्रशस्त किया। मुक्केबाजी के खिलाफ अपने पिता के मजबूत विरोध के बावजूद, क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि मैरी एथलेटिक्स में उत्कृष्टता हासिल करें, मैरी बिना किसी डर के आगे बढ़ीं और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज बन गईं। इन्होंने कई लोगों के मुक्केबाजी के बारे में उनके विचारों को एक खेल के रूप में बदल दिया है। दो साल के अंतराल से उनके प्रदर्शन पर कोई फर्क नहीं पड़ता और वास्तव में, वह अपने पति, ओन्लर के समर्थन के साथ अपने समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ मुक्केबाज के रूप में मजबूत हुई।

सितारा बनने तक मैरीकॉम की यात्रा

एक उग्र बच्चे के रूप में, मैरी ने मणिपुरी मुक्केबाज डिंग्को सिंह से प्रेरणा ली, जिन्होंने 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद ही एमसी मैरी कॉम ने 2000 में अपनी मुक्केबाजी को आगे बढ़ाने के लिए इम्फाल जाने का फैसला किया। मुक्केबाजी संघ से उनकी खराब पृष्ठभूमि और विपक्ष के बावजूद, मैरी अपनी सभी बाधाओं से लड़ीं और एक चैंपियन बन कर उभरीं। मूल रूप से उनकी दादी द्वारा चंग्नेइजैंग नाम दिया गया, इसके बाद वह ‘मैरीकॉम’ के नाम से प्रसिद्ध हो गईं, क्योंकि यह आसान है और एक ईसाई होने के नाते शोभनीय भी।

एक वंचित रूप से, युवा मैरी कॉम विश्व चैंपियन बन गईं और कई लोगों लिए एक रोल मॉडल बनी। यात्रा आसान नहीं थी लेकिन मैरी बाधाओं पर काबू पाने में विश्वास रखती हैं। यद्यपि वह बचपन से एथलेटिक्स में रूचि रखती थी, लेकिन यह मुक्केबाजी थी जिसने उन्हें अधिक आकर्षित किया। मणिपुर में स्टेट बॉक्सिंग कोच, एम. नरजीत सिंह से कोचिंग के साथ, मैरी ने इम्फाल में अपना प्रशिक्षण शुरू किया। 2008 में, इन्होंने दो साल के ब्रेक के बाद एशियाई महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। उसी वर्ष मैरी ने चीन में एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में वियतनाम में 2009 एशियाई इंडोर खेलों में स्वर्ण पदक जीता, इसके बाद इन्होंने अपना चौथा सीधा स्वर्ण पदक जीता।

2010 में, मैरी कॉम ने एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। 2010 एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह में क्वींस बेटन को वहन करना उनकी महानता ही थी। दुर्भाग्य से, वह खेलों में भाग नहीं ले सकीं क्योंकि महिला मुक्केबाजी शामिल नहीं थीं। बारबाडोस में आयोजित एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में, इन्होंने लगातार पांचवां स्वर्ण जीता। 2011 में, इन्होंने चीन में एशियाई महिला कप में स्वर्ण पदक जीता और मंगोलिया में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में 2012 में स्वर्ण जीतने के लिए आगे बढ़ीं।

मैरी कॉम ने दक्षिण कोरिया के इंचियोन में आयोजित 2014 एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता, जिससे ये एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला बन गई। मैरी कॉम ने लंदन में 2012 ओलंपिक में अपना पहला ओलंपिक कांस्य पदक जीता। मणिपुर सरकार ने इनाम के रूप में मैरी कॉम को 50 लाख रुपये और दो एकड़ भूमि से सम्मानित किया। मैरी ने अब अपने लिए एक नाम बनाया था और जो अब सुपर फाइट लीग बन गया – मिश्रित मार्शल आर्ट रियलिटी शो – ब्रांड एंबेसडर।

26 अप्रैल 2016 को, भारत के राष्ट्रपति ने मैरी कॉम को राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामित किया। 2017 में, अखिल कुमार के साथ, मैरी कॉम को मुक्केबाजी के लिए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। 24 नवंबर, 2018 को, मैरी कॉम 6 विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनीं। नई दिल्ली में आयोजित 10 वीं एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में हन्ना ओखोटा को हराकर कॉम ने इस अद्भुत उपलब्धि को हासिल किया।

एक ऑल-राउंडर

एक चैंपियन बनने की इच्छा के साथ, मैरी ने कोच के. कोसाना मीतेई से संपर्क किया। इन्होंने अपना स्वयं का नाम कमाने और अपने परिवार को गरीबी से बाहर लाने के लिए का दृढ़ फैसला कर रखा था। वह 2013 में पैदा हुए जुड़वां बेटों और एक और लड़के के साथ एक खुश परिवार के साथ अपने करियर में बहादुरी का पुरस्कार जोड़ने में सफल हुईं, जो वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। इन्होंने इसे संतुलित रखा और आखिरकार अपने आप को एक चैंपियन के रूप में निखारा। मैरी कॉम ने इम्फाल में फीमेल-ओनली के लिए एक क्लब  की शुरूआत की है, जहां वे यौन हिंसा के खिलाफ स्वयं को बचाने के लिए बालिकाओं को प्रशिक्षित करती है। इतना ही नहीं, मैरी युवाओं को निशुल्क प्रशिक्षित करने का कार्य भी करती हैं। मैरी कॉम का मानना है कि वंचित मुक्केबाजों के लिए उनके द्वारा दिया जाने वाला समर्थन उन्हें अपने कौशल को बढ़ाने और खेल में उजागर करके आत्मविश्वास हासिल कराने में मदद करेगा।

व्यक्तिगत जीवन

मैरी कॉम का जन्म मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में कंगथी गांव में हुआ था। इनके माता-पिता का नाम मोंटे टोंपा कॉम और मांगटे अखम कॉम था। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लोकतक क्रिश्चियन मॉडल हाई स्कूल से पूरी की और इसके बाद इन्होंने सेंट जेवियर कैथोलिक स्कूल, मोइरंग में भाग लिया। कक्षा IX और X की शिक्षा के लिए ये इम्फाल के आदिमजती हाई स्कूल में गई, लेकिन मैट्रिक परीक्षा को उत्तीर्ण करने में असफल हो गईं। इसके बाद फिर से मैट्रिक के लिए पढाई करने में इच्छा न होने के कारण, इन्होंने अपना स्कूल छोड़कर एनआईओएस, इम्फाल और चुराचंदपुर कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इनका विवाह कें ओन्लर कॉम से हुआ था। इनके जुड़वां बेटे, जिनका नाम रेचुंगवार और खुपनेवार है तथा एक औऱ बेटा प्रिंस चुंगथांगलेन कॉम है जिसका जन्म  2013 में हुआ है। ओन्लर और मैरी 2001 में मिले थे। इसके कुछ सालों बाद 2005 में, इन्होंने विवाह कर लिया था।

बॉलीवुड में मुक्केबाज़ी

मैरी कॉम की आलीशान जीत और मुक्केबाजी के प्रति दृढ़ संकल्प ने उनके रास्ते की सभी बाधाओं को हटाकर उन्हें एक सितारा बना दिया। वे बॉलीवुड ब्लिट्ज से भी दूर नहीं रह सकीं और 2014 में संजय लीला भंसाली के साथ मैरीकॉम नाम की एक फिल्म बनाई। इस मैरी कॉम फिल्म में मैरी कॉम की भूमिका प्रियंका चोपड़ा ने निभाई थी और इसमें मैरी कॉम की ही कहानी को दिखाया गया है।

फिल्म, मैरी कॉम में इनके बारे में दिखाया कि इनके पास मुक्केबाजी कैरियर तक आसानी से पहँचने के लिए सभी संसाधन तो नहीं थे, लेकिन मक्केबाजी के प्रति वह समर्पण था जिसकी सीमा को कोई नहीं जानता। जैसा कि हम आज जानते हैं, कि फ्लैशबैक घटनाओं की एक श्रृंखला के साथ एक सामान्य लड़की की यात्रा से लेकर उसके बॉक्सर में परिवर्तन तक के सफर को दर्शाते हुए, मैरी कॉम फिल्म ने कई दिल को छुआ है। विवाहित जीवन और बच्चों के होते भी इन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर जरा भी फर्क नहीं आने दिया। इसके साथ ही फिल्म में इनके अतीत और कठिनाइयों के साथ-साथ ये भी दिखाया गया है कि मुक्केबाजी के लिए इनको अपने पिता का भी विरोध करना पड़ा था। हालांकि, उनकी जीत में उनके सहायक पति ऑनलर कॉम का भी बराबर का हिस्सा है। क्योंकि वे हमेशा हर निर्णय में अपनी पत्नी के साथ खड़े हुए थे जिससे वे एक विजयी मैरी के रुप में सामने आयीं। मैरी के शाश्वत हिम्मत और मुक्केबाजी के लिए प्यार को देखकर दर्शकों में ज़िम्मेदारी की भावना आयी। दर्शकों की समीक्षा के मुताबिक, भारत के लोग चाहते हैं कि हमारा देश ऐसी उज्ज्वल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित और उनका समर्थन करे जो सभी बाधाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ने का शाहस रखते हैं।

मैरी कॉम द्वारा जीते अंतर्राष्ट्रीय खिताब

साल पदक वजन प्रतियोगिता स्थान
2001 रजत 48 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप स्क्रैंटन, पेंसिल्वेनिया, संयुक्त राज्य अमरीका
2002 गोल्ड 45 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप एंटाल्या, तुर्की
2002 गोल्ड 45 विच कप पेक्स , हंगरी
2003 गोल्ड 46 एशियाई महिला चैम्पियनशिप हिसार, भारत
2004 गोल्ड 41 महिला विश्व कप टॉन्सबर्ग , नॉर्वे
2005 गोल्ड 46 एशियाई महिला चैम्पियनशिप काऊशुंग, ताइवान
2005 गोल्ड 46 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप पोदोल्स्क, रूस
2006 गोल्ड 46 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप नई दिल्ली भारत
2006 गोल्ड 46 वीनस महिला बॉक्स कप वेजले , डेनमार्क
2008 गोल्ड 46 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप निंग्बो, चीन
2008 रजत 46 एशियाई महिला चैम्पियनशिप गुवाहाटी, भारत
2009 गोल्ड 46 एशियाई इंडोर गेम्स हनोई, वियतनाम
2010 गोल्ड 48 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप ब्रिजटाउन, बारबाडोस
2010 गोल्ड 46 एशियाई महिला चैम्पियनशिप अस्ताना, कज़ाखस्तान
2010 कांस्य 51 एशियाई खेल ग्वांगझोउ, चीन
2011 गोल्ड 48 एशियाई महिला कप हाइकोऊ, चीन
2012 गोल्ड 41 एशियाई महिला चैम्पियनशिप उलान बतोर, मंगोलिया
2012 कांस्य 51 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक लंदन, यूनाइटेड किंगडम
2014 गोल्ड 51 एशियाई खेल इंचियोन, दक्षिण कोरिया
2017 गोल्ड 48 एशियाई महिला चैम्पियनशिप हो ची मिन्ह शहर, वियतनाम
2018 गोल्ड 45-48 राष्ट्रमंडल खेल गोल्ड कोस्ट, क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया
2018 गोल्ड 45-48 एआईबीए महिला विश्व चैम्पियनशिप नई दिल्ली भारत