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जीएसटी के लिए क्या हैं मौजूदा बाधाएं?

July 19, 2017


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gst-problems-hindiवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए दो हफ़्ते से अधिक हो चुका है और अब अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के लोगों को दिन प्रतिदिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अभी, सीमा शुल्क मानदंडों पर भ्रम का मतलब है कि लाखों डॉलर का निर्यात लायक माल कारखानों में पड़ा है। सरकार ने आगे आकर मुद्दों को हल करने की कोशिश की है। इससे पहले भी सरकार ने कुछ स्पष्टीकरण जारी किए थे लेकिन निर्यातकों को उनमें कुछ चीजें समझ नहीं आयीं। सरकार ने पहले ही स्थिति का विश्लेषण कर लिया है और उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर अधिक स्पष्टीकरण के साथ सामने आएगी।

चीजों को साथ में चलाना

आशानुरूप चीजें आगे बढ़ जाएंगी ऐसी उम्मीद की जा रही है। अजय सहाय फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के महानिदेशक ने कहा है कि माल अभी कारखानों के भीतर फंसा पड़ा है। ज्यादातर निर्यातक इनपुट टैक्स के लिए क्रेडिट का दावा करने की प्रक्रिया के साथ संबंध रखते हैं और उनको  प्रदान किए जाने वाले दस्तावेज अभी छापे जा रहे हैं। वे इसलिए भी चिंतित हैं कि वे एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का भुगतान करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट, जो निर्यात पर लगाया जा रहा है उसका उपयोग कैसे करेंगे। अब तक निर्यातकों को उपक्रम का एक पत्र (एलयूटी) या अनुबंध प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि कस्टम अधिकारी उनके निर्यात की खपत को जारी कर सकें।

नकदी की कमी

कारोबार बंद होने के अलावा, निर्यातक महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे कि नकदी की कमी, निर्यात के शुरुआती मुनाफे में देरी, और जीएसटी के कारण काम करने में समग्र समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। नकदी की समस्या हो रही है क्योंकि मौजूदा प्रणाली के मानकों के आधार पर पहले जीएसटी का भुगतान करना आवश्यक है और फिर आप धन वापसी का दावा कर सकते हैं। इसका मतलब यह भी है कि कार्यशील पूंजी को अवरुद्ध कर दिया गया है। निर्यातकों ने एक तंत्र के लिए पहले से ही माँग की है जिसके तहत उन्हें वर्तमान प्रणाली से छूट दी गई है। एफआईईओ के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने पहले ही इस मुद्दे को सुलझाने के लिए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण की मदद मांगी है।

छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए समस्याएं

जीएसटी ने छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी बड़ी समस्याएं पैदा की हैं जो कि एक साथ काम कर रहे थे। 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद, इसे आजादी के बाद भारत में सबसे बड़ा कर सुधार बताया गया। इसकी कल्पना सैकड़ों संघीय और क्षेत्रीय करों के स्थान पर एक केंद्रीय कर के रुप में की गई थी। हालांकि, खुदरा विक्रेताओं ने अपनी बेचैनी को समझा है कि यह जो कुछ भी है सही है। चिंता का सबसे बड़ा क्षेत्र उत्पाद वर्गीकरण और प्रलेखन के बारे में मनोदशा है।

लोकप्रिय प्रतिक्रिया

व्यावसायिक संस्थाओं के अलावा, आम लोग भी जीएसटी के बाद माल पर दर के बारे में काफी उलझन में हैं और दुकानदारों को हर ग्राहक को जीएसटी नियमों के तहत कराए जाने वाले करों की व्याख्या करने में दिक्कत होती है। लोगों ने जनता को भ्रमित करने और दुकान के मालिकों के दैनिक लेनदेन में आ रही परेशानियों के लिए सरकार को दोषी ठहराया है। अरुण जेटली ने एक सप्ताह पहले ही एक ऐप लॉन्च किया था, जिससे लोगों को जीएसटी दरों में विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की जानकारी पाने में मदद मिली लेकिन वास्तविकता में यह ऐप उपयोगी नहीं रहा।

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