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विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली और इसकी कार्य पद्धति

June 30, 2017


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credit-system-hindiदिल्ली विश्वविद्यालय ने नए सत्र 2015-16 के लिए इस सप्ताह प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के साथ, स्नातक कार्यक्रमों के लिए विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) के कार्यान्वयन के लिए हरी झंडी दे दी है। सीबीसीएस प्रणाली की आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम, समय सारिणी और मूल्यांकन प्रक्रिया तैयार की जाएगी या वह पिछली प्रणाली के अनुसार जारी रहेंगी, जैसी भ्रम पैदा करने वाली बातें लंबे समय से महाविद्यालयों के बारे में चल रही थीं। आइए इस प्रणाली के बारे में कुछ जानकारी प्राप्त करें।

विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली क्या है?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) कार्यक्रम के साथ एकजुट होना प्रारम्भ कर दिया है, जिसमें छात्रों के पास निर्धारित पाठ्यक्रमों का चयन करने का विकल्प होता है, जिसे मूल, निर्वाचित या मामूली या मृदु कौशल पाठ्यक्रम के रूप में संदर्भित किया जाता है और जिसे वह अपने हिसाब से सीख सकते हैं, यह संपूर्ण मूल्यांकन क्रेडिट आधारित प्रणाली पर आधारित है। इसका मूल विचार छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखना है, ताकि भारत और विदेशों में उच्च शिक्षा के विकास के साथ-साथ आधुनिकता बनी रहे। सीबीसीएस का उद्देश्य शिक्षा में उदारीकरण और वैश्वीकरण को साथ बनाए रखने के लिए, पाठ्यक्रम को फिर से परिभाषित करना है। सीबीसीएस छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट के हस्तांतरण की सुविधा के साथ-साथ दुनिया भर में फैले विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के लिए गतिशीलता का एक आसान तरीका प्रदान करता है।

सीबीसीएस की विशेषताएं

  • सीबीसीएस सभी केंद्रीय, राज्य और अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के लिए एक समान है।
  • इसके तीन मुख्य पाठ्यक्रम- मूल, वैकल्पिक और बुनियादी हैं।
  • इसमें निराकलनीय पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं, जिसका मूल्यांकन ‘संतोषजनक’ या ‘असंतोषजनक’ रूप में किया जाता है। यह एसजीपीए या सीजीपीए की गणना में शामिल नहीं है।
  • एक प्रभावी और संतुलित परिणाम प्रदान करने के लिए तीनों मुख्य पाठ्यक्रमों का मूल्यांकन और उपयोग किया जाता है।

यह कैसे काम करता है?

इसमें निम्नलिखित मूल तत्व हैं:

  • सेमेस्टर: मूल्यांकन सेमेस्टर के अनुसार किया जाता है। इसमें एक छात्र विज्ञान, कला, वाणिज्य के लिए तीन साल और अभियांत्रिकी के लिए चार साल के पाठ्यक्रम के बजाय सीबीसीएस पाठ्यक्रमों के आधार पर प्रगति करता है। प्रत्येक सेमेस्टर में 15 से 18 सप्ताह शैक्षणिक कार्य होता है, जो 90 शिक्षण दिवस के बराबर होगा। यह पाठ्यक्रम सामग्री बनाने और पाठ्यक्रम की सामग्री और शिक्षण के समय में क्रेडिट आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने में काफी सुगम्य है।
  • क्रेडिट प्रणाली: प्रत्येक पाठ्यक्रम को एक निश्चित क्रेडिट सौंपा गया है। जब छात्र उस पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करता है, तो वह उस पाठ्यक्रम पर आधारित क्रेडिट का हकदार होता है। यदि कोई छात्र एक सेमेस्टर में एक पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करता है, तो उसे बाद में उस पाठ्यक्रम को दोहराना नहीं पड़ता है। छात्र आत्म लगन के अनुसार क्रेडिट प्राप्त कर सकते हैं।
  • क्रेडिट हस्तांतरण: यदि कुछ कारणों से छात्र अध्ययन का भार न सहन कर पाएं या वह बीमार हो जाएं, तो उसे इन पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने और कम क्रेडिट अर्जित करने की आजादी है, वह इसकी भरपाई अगले सेमेस्टर में कर सकता है।
  • व्यापक निरंतर मूल्यांकन: छात्रवृत्ति का लगातार मूल्यांकन न केवल शिक्षकों द्वारा बल्कि छात्रों द्वारा स्वयं किया जा सकता है।
  • ग्रेडिंग: यूजीसी ने 10-अंक ग्रेडिंग प्रणाली की शुरुआत की है:
  1. O (सर्वोत्तम): 10
  2. A+ (अति उत्कृष्ट): 9
  3. A (बहुत अच्छा): 8
  4. B+ (अच्छा): 7
  5. B (औसत से ऊपर): 6
  6. C (औसतन): 5
  7. P (पास): 4
  8. F (अनउत्तीर्ण): 0
  9. AB (अनुपस्थित): 0

क्रेडिट की गणना कैसे की जाती है?

एक क्रेडिट प्रति सेमेस्टर के एक घंटे के शिक्षण के बराबर है, जिसमें व्याख्यान (एल) या शिक्षण (टी) या व्यावहारिक कार्य या क्षेत्र कार्य (पी) प्रति सप्ताह दो घंटे शामिल हैं। एक अध्ययन पाठ्यक्रम में केवल एल घटक या केवल टी या पी घटक या दो या तीन सभी घटकों का संयोजन हो सकता है। प्रत्येक सेमेस्टर में एक छात्र एल+टी+पी कुल क्रेडिट अर्जित कर सकता है।

वैश्विक ग्रेडिंग प्रणाली की स्वीकृति

दुनिया भर में सभी प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान क्रेडिट की एक प्रणाली को लागू कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, हमारे पास यूरोप के विश्वविद्यालयों में यूरोपीय क्रेडिट हस्तानांतरण प्रणाली (ईसीटीएस) है, जो ऑस्ट्रेलिया में ‘राष्ट्रीय योग्यता का आधार’ है। यूनिवर्सिटी का क्रेडिट हस्तांतरण पैन-कैनेडियन का प्रोटोकॉल है। हमारे पास यूके की क्रेडिट संचय और स्थानांतरण प्रणाली (सीएटीएस) है। यहाँ तक ​​कि अमेरिका और जापान आदि में चल रही शिक्षण व्यवस्था क्रेडिट प्रणाली पर आधारित है।

विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली के लाभ

  • सीबीसीएस एक ‘कैफेटेरिया’ (विशेष कार्यक्रम) दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिसमें छात्र अपने पसंदीदा पाठ्यक्रम को चुन सकते हैं।
  • क्रेडिट प्रणाली एक छात्र को उसके हितों के अनुसार अपनी खुद की पसंद के बारे में अध्ययन करने की अनुमति देता है।
  • छात्र आत्मलगनता से इसे शीघ्र सीख सकते हैं।
  • वे अतिरिक्त पाठ्यक्रमों के विकल्प चुन सकते हैं और आवश्यक क्रेडिट से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • वे सीखने के लिए एक बहुविषयक दृष्टिकोण का विकल्प चुन सकते हैं।
  • देश और बाहर के इंटर कॉलेज या विश्वविद्यालय आसानी से क्रेडिट का हस्तांतरण कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि विदेशी विश्वविद्यालयों का भारत में अपने पाठ्यक्रमों की पेशकश करना आसान होगा।
  • एक संस्थान में पाठ्यक्रम के एक भाग के लिए और दूसरे संस्थान में पाठ्यक्रम के दूसरे भाग का विकल्प चुन सकते हैं। इससे अच्छे और अनुपयुक्त विश्वविद्यालय या संस्थानों के बीच एक स्पष्ट विकल्प की स्थापना करने में मदद मिलेगी।
  • छात्र अपने कौशल को बढ़ाने और उद्यमियों को शामिल करने के लिए परियोजनाओं और सौंपे गये कार्यों, व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे अधिक अवसरों का फायदा उठा सकते हैं।
  • यह प्रणाली छात्रों के लिये रोजगार के अवसरों में सुधार करती है।
  • प्रणाली संभावित नियोक्ताओं को और वैज्ञानिक स्तर पर छात्रों को प्रदर्शन का समर्थन करने में मदद करेगी।

सीबीसीएस के नुकसान

  • सटीक अंकों का अनुमान लगाना आसान नहीं है।
  • शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ सकता है।
  • शिक्षा के सार्वभौम प्रसार के लिए उचित और अच्छे बुनियादी ढाँचे की जरूरत है।

निष्कर्ष: यह जानना अति आवश्यक है कि क्या सीबीसीएस सफल होगा या नहीं। यूजीसी ने भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में दक्षता और उत्कृष्टता लाने के लिए हमेशा उचित कदम उठाए हैं। इसका मूल उद्देश्य सभी पहलुओं में शैक्षिक गुणवत्ता के सही पाठ्यक्रम को सीखने के लिए, शिक्षण प्रक्रिया में परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली का विस्तार करना है। हालांकि, अब तक देश भर में विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षा, मूल्यांकन और ग्रेडिंग प्रणाली के लिए कई तरीकों का पालन किया गया है। इस विविधता को ध्यान में रखते हुए, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली का क्रियान्वयन एक छात्र के समग्र प्रदर्शन को एक सिंगल ग्रेडिंग सिस्टम के सार्वभौमिक तरीके से मूल्यांकन करने में एक अच्छी प्रणाली है।