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डेंगू और चिकनगुनिया के प्रकोप: कारण, लक्षण और निवारण

July 9, 2018


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डेंगू और चिकनगुनिया के प्रकोप: कारण, लक्षण और निवारण

भारत में मानसून का मौसम भरपूर फसलों और कई त्यौहारोंके साथ ठंडी मूसलाधार बारिश साथ लाताहै। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से बारिश राष्ट्रीय राजधानी में लोगों के लिए बीमारी, दुःख और भय उत्पन्न कर रही है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों की खबरें एक बार फिर से सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी के नए मामलों की संख्या हर हफ्ते काफी बढ़ती जा रही है।

राजधानी क्षेत्र को साल – 2015 में सबसे खराब डेंगू प्रकोपों का सामना करना पड़ा, जिसमें नगर निकाय के साथ 15,867 डेंगू के मामलों की पुष्टि की गई और मृत्यु दर 60 तक पहुंच गई थी। 2016 में, चिकनगुनिया के मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है – 2013 में 18 मामले, 2014 में 8 मामले, 2015 में दिल्ली के एनसीआर में 64 मामले सामने आए थे। इस वर्ष चिकनगुनिया के मामलों की अधिक संख्या निश्चित रूप से एक अप्रत्याशित घटना होगी क्योंकि डेंगू के विपरीत, यह बीमारी स्थानिक नहीं है, यानी किसी विशेष क्षेत्र में नियमित रूप से इस बीमारी के घटित होने की संभावना नहीं रहती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में एक नए प्रकार का डेंगू 3 स्ट्रेन का प्रकोप जारी है।

हालांकि, इस प्रकार की बीमारी से स्वास्थ्य पर मामूली प्रभाव पड़ने से और मामूली लक्षण दिखने पर अधिकांश पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है।

डेंगू और चिकनगुनिया का क्या कारणहै?

चिकनगुनिया और डेंगू जैसी दोनों बीमारियां मच्छर के काटने के कारण होती हैं। मादा एडीज इजिप्ती मच्छर को इसका कारण माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में, एडीज अल्बोपिक्टस मच्छर भी वाहक हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इन मच्छरों द्वारा फैले 5अलग-अलग प्रकार के वायरस होते हैं, जो किसी भी बीमारी का कारण बन सकते हैं। डेंगू गैर संक्रामक रोग है, यानी, यह सीधे एक मरीज से दूसरे व्यक्ति तक फैल नहीं सकता है। चिकनगुनिया का वायरस भी इसी मच्छर द्वारा फैलता है। रक्त और शरीर में मौजूद विशेष प्रकार के वायरस दोनों के बीच भिन्नताओं को पहचानने में मदद कर सकते है।

दिखाई देने वाले लक्षण

चिकनगुनिया

कुछ रोगियों में चिकनगुनिया असीमित तरीके से होता है, लेकिन 72 प्रतिशत से अधिक रोगियों में यह बीमारी अपने स्थायी लक्षण छोड़ देती है। शुरुआत में तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, आँखों में सूजन और अधिक थकान इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस स्थिति के बाद, बुखार कम हो जाता है लेकिन थकान और सिरदर्द बना रहता है। अधिकांश रोगी जोड़ों के दर्द से पीड़ित रहते हैं। रोगी को यह दर्द हफ्तों और महीनों तक रह सकता है। इस बीमारी की शुरुआत के दौरान लाल चकत्ते और पाचन समस्या भी हो सकती है।

डेंगू

चिकनगुनिया की तरह, डेंगू में भी तेज बुखार, तेज सिरदर्द, उल्टी, अंगों में दर्द और लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। कई रोगियों में डेंगू एक हीमोरेजिक बुखार  (रक्तचाप) का कारण बनता है जिसके परिणाम स्वरूप कम रक्त प्लेटलेट के स्तर और रक्त प्लाज्मा का रिसाव होता है। ऐसे मामलों में रक्त संचार आवश्यक हो सकता है। डेंगू की बीमारी से बड़े पैमाने पर रक्तस्राव हो सकता है और इसके परिणाम स्वरूप मृत्यु भी हो सकती है।

एक रोगी में चिकनगुनिया और डेंगू के बीच अंतर करने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण और रक्त परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है। ये परीक्षण रोगी के खून में विशेष प्रकार के वायरस का पता लगा सकते हैं।

नगर पालिका निगम क्या कर रहे हैं?

डेंगू और चिकनगुनिया के प्रकोप के खिलाफ लड़ाई में, दिल्ली की तीन नगर पालिकाएं क्षेत्रों में धूनी जलाकर बीमारियों की सूचना दे रहे हैं। समाचार रिपोर्ट के अनुसार नगर अधिकारियों ने एक साथ अपने अधिकार क्षेत्र के तहत 13 प्रतिशत परिवारों में धूनी जलाने का काम किया है। हालांकि, इस बीमारी के लिए ये प्रयास काफी नहीं हैं, ऐसा कई लोगों का मानना है। निगमों की ढीलासाजी की बजह से काफी निराश होना पड़ रहा है, खासकर पिछले साल के विनाशकारी डेंगू प्रकोप के फैलने की बजह से।

तीन एमसीडी अपनी स्वयं की चिंताओं से जूझने का दावा कर रहे हैं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी), पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी), और उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने एक साथ इस कार्य को प्रभावी ढंग से करने  के लिए 1,000 वैकेन्सी (रिक्त पदों) की सूचना दी है।

डेंगू और चिकनगुनिया को कैसे रोंके

डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए सबसे अच्छा उपाय है सावधानी बरतना।

  • घर और पास-पड़ोस में सफाई रखें। बंद कूड़ेदान और कचरा निपटान प्रणाली का प्रयोग करें।
  • पास-पड़ोस में पानी को इकट्ठा न होने दें। रुके हुए पानी में और खुले रखे पानी में मच्छर प्रजनन का स्थान बना सकतेहैं। टैंक और एयर कूलर की नियमित रूप से सफाई करें।
  • मच्छर जाल, और मच्छर कॉइल और डीईईटी युक्त विषाक्त चीजों का प्रयोग करें।
  • धूनी को अपने कार्यों को परिश्रमपूर्वक करने दें। एमसीडी को खुली कचरे के बारे में जानकारी प्रदान करें।

आपके उपचार विकल्प क्या हैं

मानसून के मौसम में तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों का दर्द और चकत्ते के मामले में डॉक्टर या चिकित्सा केंद्र से संपर्क करना सबसे अच्छा है। डेंगू का पता जल्दी लगाने से बीमारी पर काबू पाना आसान हो जाता है।

डेंगू बुखार का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इसके मरीजों को सेवन के लिए उच्च तरल पदार्थ का आहार दिया जाता है आमतौर पर बुखार और दर्द को नियंत्रित करने के लिए एसिटामिनोफेन का उपयोग किया जाता है।

इबप्रोफेन और एस्पिरिन समेत नियमित दर्द निवारक दवाओं से बचा जाता है। कई मामलों में, नसों में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट पहुँचाने के लिए (उल्टी और बुखार के कारण निर्जलीकरण के कारण) के लिए अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी हो जाता है।

कम रक्त प्लेटलेट गिनती के मामले में डेंगू रोगियों को भी नियमित रक्तचाप की निगरानी और रक्त संक्रमण की आवश्यकता होती है। चिकनगुनिया के मामले में, उपचार में तरल पदार्थ का सेवन और ज्यादा से ज्यादा आराम करना पड़ता है। इस मामले में,बुखार और जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एसिटामिनोफेन और इबुप्रोफेन का उपयोग नियमित रूप से किया जाता है।

इन दोनों बीमारियों में डेंगू अधिक खतरनाक साबित होताहै क्योंकि यह हर साल कई पीड़ितों की जान ले लेता है, जबकि चिकनगुनिया की, आमतौर पर मृत्यु दर बहुत कम (1000 में 1) होती है। सामान्यरूप से बीमारी ठीक होने के बावजूद भी, चिकनगुनिया के रोगी लंबे समय तक,यहां तक कि सालोंतक जोड़ों के दर्द से पीड़ित रहते हैं। चिकनगुनिया वायरस से प्रभावित रोगी को बाद में संक्रमण नहीं होता है, जबकि डेंगू के मामले में पीड़ित को दोबारा इसी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।

केवल दिल्ली?

मानसून के मौसम में डेंगू और चिकनगुनिया के फैलने से प्रभावित दिल्ली भारत का अकेला हिस्सा नहीं है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कई जिलों ने भी इस साल एक खतरनाक डेंगू प्रकोप के बारे में सूचना दी है।