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नॉर्थ सेंटिनल द्वीप की जनजाति: एक राय

December 3, 2018


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नॉर्थ सेंटिनल द्वीप की जनजाति: एक राय

नवंबर 2018 को नॉर्थ सेंटिनल द्वीप अंडमान और निकोबार में आदिवासियों ने एक 27 साल के अमेरिकी नागरिक जॉन ऐलन चाऊ की हत्या कर दी थी। लगभग 15 दिन बाद 30 नवंबर को अधिकारियों को जटिलताओं के चलते अभी तक चाऊ का मृत शरीर बरामद नहीं हुआ है।

यात्री के लिए दुख के बीच उन लोगों, अर्थात् सेंटिनलीज जनजाति, के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है, जिन्होंने उसकी ‘हत्या’ कर दी। अन्य ने सुझाव दिया है कि दोनों जनजातियों, साथ ही चाऊ के शरीर को अकेला छोड़ दिया जाना चाहिए। तो, किसकी राय पर विचार किया जाना चाहिए? जानने के लिए पढ़ें।

नॉर्थ सेंटिनल द्वीप 

नॉर्थ सेंटिनल द्वीप

सेंटिनल जनजाति कौन हैं?

उत्तरी सेंटिनेल अंडमान और निकोबार क्षेत्र में 572 द्वीपों में से एक है। जबकि दक्षिण सेंटिनेल द्वीप, बहुत छोटा और निर्वासित है। उत्तरी सेंटिनल के बारे में दुनिया शायद बहुत कम जानती है।

इन्हें सेंटिनलीज, इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनकी आत्म-पहचान के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। कहीं न कहीं 15-500 की आबादी के बीच, जनजाति किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं बनाना चाहती, जितना कि देश को इसके बारे में जानकारी है। अगर बाहरी लोग द्वीप में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं तो सेंटिनलीज द्वारा उस पर हमला कर दिया जाता है। आज तक, उनके बारे में बहुत कम जानकारी है।

जॉन एलन चाऊ का मामला

चाऊ ने अपनी व्यक्तिगत पत्रिका में अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले लिखा, “हे भगवान, यह द्वीप शैतान का आखिरी गढ़ है, जहां न कोई सुनता है और न ही सुनाने का कोई मौका देता है।”

उन लोगों के मुताबिक जो जॉन को जानते थे, जॉन ने जैसे ही पहली बार द्वीप पर कदम रखा सेंटिनेलिस आदिवासियों ने उसे अपनी तरफ खींच लिया। रेमको स्नोजी के अनुसार, जो 2016 में पहली बार जॉन से मिला था, का कहना था कि वह युवा मिशनरी जनजाति में ‘बेहद दिलचस्पी’ रखता था। अंडमान और निकोबार में स्नॉजी की दुकान थी जहां जॉन एलन चाऊ, जब वह 2016 में गया था, तब स्कूबा डाइब (गोताखोरी) कैसे करें, यह सीखने का इच्छुक था।

नवंबर 2018 में, चाऊ ने कुछ मछुआरों को उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर भेजने का विचार किया, जहां वह स्पष्ट रूप से जाकर यीशु के संदेशों को फैलाना चाहता था। 14 नवंबर को, चाऊ ने द्वीप के समुद्र तट पर भाले और तीर कमान वाले पुरुषों को देखा, और पीछे हटने से पहले अपने और यीशु के प्रति उनके प्यार को प्रकट किया।

जॉन एलन चाऊ ने द्वीप पर लगातार दो यात्राएं की- 14 नवंबर और अंतिम यात्रा 16 नवंबर को की। दूसरे दिन परिणामस्वरूप आदिवासियों के एक युवा सदस्य ने जॉन एलन चाऊ पर तीर से हमला कर दिया, जो बाइबिल को भेदने हुए उसके पार हो गया। 16 नवंबर को, डॉन एलन चाऊ ने मछुआरों से उसे द्वीप पर छोड़ने के लिए समझाते हुए यह कहा था कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो उसके परिवार से संपर्क हो जाए। अगले दिन, मछुआरों ने बताया कि आदिवासी चाऊ के शरीर को रेत में खींचकर समुद्र तट पर दफन कर रहे थे।

एक करीबी छानबीन

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (आईसीसी), एक अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठन ने हत्या की निंदा की है, या जैसा कि वे कहते हैं, सेंटिनेलिस द्वारा युवा मिशनरी की ‘हत्या’। उनकी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “हम यहां … भारत के अंडमान और निकोबार द्वीपों में एक अमेरिकी मिशनरी की हत्या के बारे में बेहद चिंतित हैं। हमारे विचार और प्रार्थना जॉन के परिवार और दोस्तों दोनों के साथ हैं “।

ध्यान दें कि इसी तरह के मामले में, इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (आईसीसी) ने उल्लेख किया है कि कैसे “भारत के पास विदेशी ईसाई मिशनरियों पर हमलों का इतिहास रहा है”। यह ईसाई मिशनरियों को भारत में सामना किए जाने वाले उत्पीड़न और क्रूरता के विभिन्न रूपों का वर्णन करता है। चलिए देखते हैं कि ये मामले इतने संदिग्ध क्यों है।

क्या सेंटिनल भारत के नागरिक हैं? सैद्धांतिक तौर पर, हाँ ये भारत के नागरिक हैं। यह द्वीप भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, उत्तरी सेंटीनेल के लोग दुनिया के सबसे कम संपर्क समूह के हैं, जो किसी भी बाहरी व्यक्ति के साथ अपना संपर्क बनाना नहीं चाहते। यह वास्तव में कोई संरक्षित रहस्य नहीं है कि सेंटीनेलियां जनजाति बाहरी लोगों को बिल्कुल भी पसंद नही करती और न ही उनके साथ कोई बात करना चाहती हैं।

भारत में जो लोग ईसाई मिशनरियों पर हमला करते हैं उसी जगह पर सेंटीनेलियों को रखना बेहद अनुचित है। पूर्व के कार्यों को किसी भी घृणा, धार्मिक क्रोध से प्रेरित नहीं किया जाता है, बल्कि यह आत्मरक्षा का एक सरल कार्य है।

आइए अब, आईसीसी के जारी बयान के शीर्षक को देखते हैं। खबरों के अनुसार “अमेरिकी मिशनरी की भारत में शत्रुतापूर्ण जनजाति द्वारा हत्या कर दी थी।” दो शब्द “हत्या” और “शत्रुता” जो विशिष्टता प्राप्त करते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि जॉन एलेन चाउ की मौत बहुत ही दुखद थी। लेकिन, क्या इसे हत्या या जानबूझकर किसी की जान लेना, कहना सही है? कथित तौर पर जनजातियों द्वारा मारे जाने से पहले चाऊ द्वीप पर दो बार गए थे। जब चाऊ वहां गए तो दोनों बार, उन्हें स्पष्ट संकेत दिया गया कि उनका यहां स्वागत नहीं है। आदिवासियों ने उन्हें मारने की साजिश नहीं की थी, बात यह थी कि वे इसे “आत्मरक्षा” मानते हैं क्योंकि चाऊ उनके लिए कोई बाहरी बला के रूप में दिखते थे।

दूसरा शब्द “शत्रुतापूर्ण” के सवाल पर आगे बढ़ते हैं। 1967 में द्वीप तक पहुंचने वाले पहले मानवविज्ञानी टी. एन. पंडित और 1991 की टीम का हिस्सा जिसने जनजाति के साथ पहली बार मित्रतापूर्ण संपर्क स्थापित किया था, के अनुसार जनजाति शत्रुतापूर्ण नहीं है। वे शांति या लीड हमलों में बाधा नहीं डालते हैं। वे शांति रूप से उन्हें इस जगह को छोड़ने के लिए उन्हें संकेत देते हैं। यदि चाऊ को मारना वास्तव में उनका इरादा था, तो वे द्वीप पहले ही दौरे पर उन्हें आसानी से मार सकते थे। इसके बजाय, उन्हें चेतावनी दी गई थी कि वह अपराध न करें।

क्या सेंटिनेलियों जनजाति को वीरान जगह में छोड़ दिया जाना चाहिए?   

उत्तरी सेंटिनल द्वीप में जाकर कानून ने गलत किया गया है। यह क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह संरक्षण आदिवासी जनजाति अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आता है।     इसलिए, इस द्वीप से 10 कि.मी. की दूरी पर भी जाना अवैध है। चाऊ इस बात से अच्छी परिचित थे कि वे जो भी कर रहे थे वह ‘बिल्कुल कानूनी’ नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मछुआरों को अपने आप को सेंट सेंटिनल ले जाने के लिए 25,000 रुपये भी दिए थे।

कम से कम 30, 000 वर्षों की इस अवशिष्ट जनजाति का बाहरी दुनिया के साथ कभी भी कोई संबध नही रहा है। हालांकि उन्हें अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए उनका द्वीप पर्याप्त स्थान है, इसलिए उन्हें द्वीप से बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि जिस तरह से इन लोगों का समूह, पूरी दुनिया से अलग है उसी तरह से उनके जैविक लक्षण भी हमारे बाकी हिस्सों से अलग हैं।

उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे जितनी मजबूत नहीं है और यदि वे हमारे पर्यावरण में आते हैं तो वह अपने स्वास्थ्य को विभिन्न प्रकार के खतरों में ड़ाल लेंगे। जिनके खिलाफ उनके पास कोई बचाव नहीं है। आदिवासी संख्याओं में बहुत कम हैं और ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही उनकी वंशावली को खत्म कर सकती है।

इसलिए, चाऊ ने भी जो किया, ये सिर्फ उन आदिवासियों की व्यक्तिगत जगह का उल्लंघन ही नहीं था, बल्कि चाऊ के लिए भी अपने आप को जोखिम में डालना था। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें इस जवान व्यक्ति की मौत का जश्न मनाना चाहिए लेकिन बस इतना ही कि हम महसूस कर सकते हैं कि उनके द्वीप पर नैतिक और तार्किक रूप से अपराध करना कितना गलत है।

मानवविज्ञानी की सलाह के आधार पर, एक अच्छे कारण के साथ अधिकारियों ने भी अमेरिकी नागरिक चाऊ के शरीर को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों को बंद कर दिया है। यदि अधिकारी उनके द्वीप पर और आगे की जांच करने जाते हैं तो यह केवल ज़ेनोफोबिया को ही प्रेरित करना नहीं करेगा बल्कि अधिकारियों को अपने जीवन के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा करना होगा। क्योंकि इस द्वीप ने जो भी किया वह उनके घर की सुरक्षा का एक अधिनियम था, भले ही चाऊ का उद्देश्य उन्हें कोई नुकसान पहँचाना न हो।

निष्कर्ष? हम सभी को यह स्वीकार करना होगा कि हां मौत दर्दनाक तो है लेकिन, हत्या नहीं।

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नॉर्थ सेंटिनल द्वीप की जनजाति: एक राय
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नवंबर 2018 को नॉर्थ सेंटिनल द्वीप अंडमान और निकोबार में आदिवासियों ने एक 27 साल के अमेरिकी नागरिक जॉन ऐलन चाऊ की हत्या कर दी थी। क्या किया जाना चाहिए पर बहसबाजी बढ़ रही है। क्या दुनिया के सबसे निर्जन जनजाति को शांति में छोड़ा जाना चाहिए? न्यायोचित क्या है?