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भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता

November 22, 2018


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साल (2016) में बॉब डिलन को साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जबकि नोबेल प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि वह “महान अमेरिकी गीत परंपरा के भीतर नया काव्य अभिव्यक्ति बनाने के लिए” इसके योग्य थे। अन्यथा उनके आलोचक सोंचते हैं कि वह इसके योग्य नहीं थे। नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने का उन्माद अभी भी लोगों का उपभोग कर रहा है। इसी दौरान हम उन नोबेल पुरस्कार विजेताओं को देखें जो भारतीय हैं या हमारे देश के साथ मजबूत संबंध रखते थे।

नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय नागरिक

रवींद्रनाथ टैगोर – साहित्य में नोबेल पुरस्कार, 1913

भारत के प्रसिद्ध कवि, संगीतकार और चित्रकार रबीन्द्रनाथ टैगोर को “उनकी गहरी संवेदनशील, ताजा और सुंदर कविता” के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें बर्ड ऑफ बंगाल और गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। साहित्य के मामले में टैगोर भारत के सबसे महान व्यक्तियों में से एक थे। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगानों की भी रचना की थी। ऐसा माना जाता है कि श्रीलंका का राष्ट्रगान टैगोर की कविता से ही प्रेरित है। अब टैगोर के गीत, कविता, उपन्यास और निबंध एक पंथ के लिये उत्कृष्ट हैं।

सीवी रमन – भौतिकी में नोबेल पुरस्कार, 1930

सर चंद्रशेखर वेंकट रमन को सीवी रमन के रूप में बेहतरी से जाना जाता है। “प्रकाश के प्रकीर्णन और उसके प्रभाव की खोज” के लिये 1930 में उनको नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी इस खोज को “रमन प्रभाव” के नाम से जाना जाता है। प्रकाश किरणों की तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन की घटना, भौतिक विज्ञान की समझ को मात देने वाला एक मील का पत्थर साबित हुआ।

मदर टेरेसा – शांति में नोबेल पुरस्कार, 1979

मदर टेरेसा का जन्म मकदूनिया (मैसिडोनिया) में हुआ था, 19 वर्ष की आयु में वह भारत चली आयीं। उन्होंने भारत में अपने जीवन के बाकी हिस्से को रोमन कैथोलिक नन के रूप में गरीबों और असहायों की मदद करने में व्यतीत कर दिया। उनके मानवीय कार्यों ने उन्हें मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापना करने के लिये प्रेरित किया। गरीब और असहायों की मदद करने वाले एक मसीहा के रूप में विश्व भर में उनकी काफी सराहना की गयी, 1979 में उनको नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया  था। उनकी मृत्यु के 19 साल बाद 2016 में उन्हें रोमन चर्च द्वारा संत की उपाधि से विभूषित किया गया था।

अमर्त्य सेन – आर्थिक विज्ञान में अल्फ्रेड नोबेल की याद में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार 1998

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अपना कल्याणकारी योगदान देने के लिये अमर्त्य सेन को 1998 में आर्थिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मानिकगंज (ब्रिटिश भारत) में जन्मे सेन ने अर्थशास्त्र में अपनी शिक्षा ग्रहण की और इस विषय को अमेरिका तथा ब्रिटेन दोनों देशों के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाया। अर्थशास्त्र और सामाजिक न्याय, अकालों के सिद्धांतों और कल्याणकारी अर्थशास्त्र पर किये गये उनके शोध के कारण 1998 में उन्हें नोबेल पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

कैलाश सत्यार्थी – शांति के लिये नोबेल पुरस्कार 2014

मध्य प्रदेश के कैलाश सत्यार्थी को बच्चों और युवाओं के दमन के विरूद्ध और उनके शिक्षा के अधिकारों हेतु संघर्ष के लिये वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बच्चों के अधिकार और शिक्षा के क्षेत्र में किये गये अपने योगदान को उन्होंने प्रसिद्धि से दूर रखा। उन्होंने कंपनियों से बाल श्रमिकों को लेकर संघर्ष किया। बच्चों की शिक्षा के अधिकार क्षेत्र में किये गये उनके इस कार्य को यूनेस्को द्वारा सराहा गया है। उन्होंने पाकिस्तान के मलाला यूसुफजई के साथ इस नोबेल शांति पुरस्कार 2014, को सहभाजित किया।

मूल भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता

हर गोबिंद खुराना – फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार 1968

भारतीय मूल के अमेरिकी जैव रसायनज्ञ हर गोबिंद खुराना को मार्शल डब्ल्यू नीरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्ल्यू होल्ली के साथ, “प्रोटीन संश्लेषण में आनुवांशिक कोड की व्याख्या और उसके कार्य के लिए” 1968 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तीनों ने इस शोध से यह स्पष्ट कर दिया कि न्यूक्लिक एसिड में उपस्थित न्यूक्लियोटाइड, कोशिका के आनुवंशिक कोड के वाहक के रूप में कार्य करना, कोशिकाओं द्वारा प्रोटीन के संश्लेषण की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर – भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 1983

सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को “तारों की संरचना और विकास के महत्व के भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक अध्ययन” के लिये 1983 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के भतीजे सुब्रमण्यन चंद्रशेखर का भारत में जन्म हुआ लेकिन बाद में वह अमेरिका चले गये थे। उनकी खोजों ने तारों के विकास में शामिल भौतिक प्रक्रिया की स्थापना का  नेतृत्व किया। उन्होंने सफेद वामन द्रव्यमान की ऊपरी सीमा भी निर्धारित की जिसे चंद्रशेखर सीमा के रूप में जाना जाता है।

वेंकटरमन रामकृष्णन – रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2009

भारतीय मूल के अमेरिकी-ब्रिटिश संरचनात्मक जीव विज्ञानी वेंकटरमन रामाकृष्णन को “राइबोसोम की संरचना और कार्य के अध्ययन के लिये” थॉमस ए. स्टीट्स और एडा ई. योनाथ के साथ 2009 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह वर्तमान में रॉयल सोसाइटी (लंदन) के अध्यक्ष हैं।

भारत से संबंध रखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता

रोनाल्ड रॉस – फिजियोलॉजी या चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार 1902

सर रोनाल्ड रॉस का जन्म ब्रिटिश-भारत का हिस्सा अल्मोड़ा में हुआ था और उन्होंने 25 सालों तक भारतीय चिकित्सा सेवा के साथ काम किया। सर रॉस ने मच्छरों द्वारा मलेरिया परजीवी के संचरण को साबित करने वाली अपनी खोज के साथ हमें मलेरिया (जो उस समय काफी घातक था) से निपटने और उस पर विजय प्राप्त करने में  सक्षम बनाया।

रूडयार्ड किपलिंग – साहित्य में नोबेल पुरस्कार 1907

प्रसिद्ध कवि और लेखक रुडयार्ड किपलिंग का जन्म बॉम्बे (ब्रिटिश भारत) में हुआ था। जहाँ उनका जन्म हुआ उस देश (भारत) से उनको असीम प्रेम था। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने भारत में अपने अनुभवों जैसे द जंगल बुक जैसे कई कार्य किये। 1907 में उन्हें साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

14 वें दलाई लामा – नोबेल शांति पुरस्कार

14 वें तेनेजिन ग्यात्सो, वर्तमान में दलाई लामा को “तिब्बत की मुक्ति के संघर्ष और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास” के लिये 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। दलाई लामा शांति और सामंजस्य का चेहरा बन गए हैं, जो दुनिया भर में तिब्बत के मुद्दे के बारे में उनकी प्रतिबद्धता के लिए खड़े हुए हैं।

वी.एस. नायपॉल – साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2001

सर वीएस नायपॉल एक हिंदू भारतीय के बेटे थे जिन्होंने त्रिनिदाद से प्रवास किया था। उन्होंने 30 से अधिक पुस्तकों की रचना की। 2001 में उनको “कामों में एकजुट कथा और अविनाशी जांच करने के लिए जो हमें दबाए इतिहास की उपस्थिति देखने के लिए मजबूर करता है” के लिये साहित्य नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता
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आइए हम उन नोबेल पुरस्कार विजेताओं के बारे में जानें, जो भारतीय थे या हमारे देश के साथ मजबूती से जुड़े हुए थे।