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दिल्लीः भारत की राजधानी, लापरवाही के डंक की शिकार

November 12, 2016


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लापरवाही की शिकार भारत की राजधानी दिल्ली

लापरवाही की शिकार भारत की राजधानी दिल्ली

दिल्ली को लोग जिन्नों के शहर के तौर पर भी जानते हैं। यह भारत की राजधानी है। इस शहर का अपना बहुत ही लंबा इतिहास है। पौराणिक कथाओं में तो इसका इतिहास पांडवों के इंद्रप्रस्थ तक जाता है। दिल्ली को हमेशा से संस्कृति और परंपराओं वाला शहर माना जाता है। जिसमें कई संस्कृतियों का समावेश दिखता है और यह ही इसे भारत की सबसे रंगीला और खूबसूरत शहर बनाता है।

दिल्ली की पुरातत्व संपदा का एक समृद्ध इतिहास है। यह कुछ ऐसी बातें हैं जिसके दम पर दिल्ली के हर एक रहवासी को अपने दिल्लीवासी होने का गर्व होता है। यह वह शहर है जहां मुगल काल के प्रसिद्ध उर्दू शायर मीर, मुहम्मद तकी मीर और इब्राहिम जौंक रहे हैं और वे इससे इतना प्यार करते थे कि उन्होंने कई आकर्षक प्रस्ताव ठुकराकर इस शहर को अपना आशियाना बनाए रखा।

लेकिन पिछले कुछ समय में हालात बदलने लगे हैं। बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रदूषण और आबादी का भार दिल्ली पर बढ़ता ही जा रहा है। अपराध की दर के अलावा बलात्कार की संस्कृति पनप रही है। सार्वजनिक सेवाएं भी चूर-चूर हो चुकी हैं। आपाधापी वाले और अफरा-तफरी वाले विस्तार ने इस खूबसूरत शहर को बहुत नुकसान पहुंचाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक पहचान बन चुकी दिल्ली अब एक और त्रासदी का सामना कर रही है।

डेंगू और चिकनगुनिया पूरे शहर में फैल रहा है। पिछले छह साल में इस रोग का यह सबसे भयावह प्रसार है। डेंगू के केस की संख्या 1,300 से ज्यादा हो चुकी है। 19 से ज्यादा लोग मौत का शिकार बन चुके हैं।

डेंगू और चिकनगुनिया का विस्तार

दिल्ली महानगर पालिका निगम (एमसीडी) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 17 सितंबर 2016 तक 607 डेंगू के केस सामने आए थे, जिसमें पिछले हफ्ते 220 नए केस जुड़े हैं।

इस साल अब तक डेंगू के करीब 1,378 केस सामने आ चुके हैं।

वैसे तो विषाणु से फैलने वाला यह रोग सितंबर-अक्टूबर में अपने चरम पर होता है, लेकिन सिर्फ अगस्त में ही 652 केस रिपोर्ट हो चुके हैं।

सितंबर के दूसरे हफ्ते तक चिकनगुनिया के 1057 केस सामने आए, जिनकी पुष्टि भी हो चुकी है।

अब तक चिकनगुनिया से 15 मौतों की पुष्टि हुई है। अधिकारी अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि चिकनगुनिया से एक भी मौत नहीं हुई।
इस आपदा का सामना दिल्ली पहली बार नहीं कर रही है। पिछले कुछ बरसों में यह हर साल का सिलसिला बन गया है। आंकड़े अपनी कहानी खुद कहते हैं:

2015 में, 15,867 डेंगू केस दर्ज हुए थे। इसमें 60 लोगों की मौत हुई थी। पिछले 20 साल में यह किसी भी एक साल में डेंगू से होने वाली सबसे ज्यादा मौतें थीं।

2011 में, चिकनगुनिया से प्रभावित मरीजों की संख्या तीन अंकों तक पहुंच गया था।

1996 में डेंगू ने सबसे ज्यादा 423 जानें ली थी।

एमसीडी की नाकामी

हम एमसीडी के काम करने के सुस्त रवैये की बात करें, उससे पहले हमें यह समझना होगा कि चिकनगुनिया और डेंगू जैसी विषाणुजनित बीमारियों के फैलने की वजह क्या है। दरअसल, रिहायशी बस्तियों के पास जमा पानी मच्छरों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बने हुए हैं। जगह-जगह जमा पानी और कचरे के ढेर इन मच्छरों को जन्म दे रहे हैं।

दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 42 के तहत, “नगर निगम का यह दायित्व है कि वह सार्वजनिक शौचालयों, मूत्रालयों और अन्य सुविधागृहों के निर्माण के साथ ही पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण करें। पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था करें। कचरे और अन्य प्रदूषित सामग्री को हटाएं। अपने दायरे में आने वाले इलाकों में साफ-सफाई की व्यवस्था करें। खतरनाक बीमारियों के फैलने के लिए स्रोत बनने वाली सभी वस्तुओं को हटाएं। बिजली की व्यवस्था करें। सार्वजनिक सड़कों और अन्य स्थानों पर साफ-सफाई के साथ ही पानी-रौशनी की व्यवस्था करें।”

दिल्ली में जो हालात इस समय चल रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि दिल्ली महानगर निगम अधिनियम 1957 के हर पहलू पर एमसीडी नाकाम बित हो चुकी है। सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के एक हालिया अध्ययन से पता चला कि केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत मिले फंड्स का एमसीडी में उचित बंटवारा नहीं हुआ।

हकीकत तो यह है कि इस अध्ययन में पता चला कि नॉर्थ डेल्ही म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (एनडीएमसी) ने उत्तरी दिल्ली में साफ-सफाई के लिए मिले 46.28 करोड़ रुपए में से एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

एमसीडी की उदासीनता साफ दिखाई देती है। खासकर उत्तरी, पूर्वी और दक्षिण दिल्ली में गंदगी के हालात से नगर निगम के काम करने का तरीका साफ दिखता है। हर जगह कचरा फैला हुआ है। रिहायशी इलाके ही नहीं व्यवसायिक इलाकों में भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। एमसीडी की उदासीनता इससे साफ दिखाई देती है।

जहां तक साफ-सफाई का सवाल है, दिल्ली के यह इलाके बुरी तरह प्रभावित हैं। यहां आपको रिहायशी इलाकों, सामुदायिक उद्यानों के साथ ही व्यवसायिक इलाकों में भी गंदगी के ढेर दिख जाएंगे-

गोविंदपुरी

पड़पड़गंज में हसनपुर

ओखला, दक्षिण दिल्ली में एक उपनगरीय कॉलोनी

करावल नगर, उत्तर-पूर्वी दिल्ली  

पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार

सतबरी में रिहायशी कॉलोनी

चिकनगुनिया और डेंगू की वजह से मारे गए लोगों के प्रति कोई संवेदना नहीं रखते हुए आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो चुका है। दिल्ली सरकार ने प्राथमिक कारण गिनाए कि समस्या दिल्ली की नहीं है। बल्कि पड़ोसी राज्यों से आए मरीजों की है। उनकी वजह से यह रोग तेजी से फैल रहे हैं।

आरोप-प्रत्यारोप जारी है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के उप-राज्यपाल नजीब जंग वीकेंड्स पर काम नहीं करते। इस वजह से हालात खराब हुए। एलजी के दफ्तर और दिल्ली सरकार के बीच अब दिल्ली में स्वास्थ्य संकट से निपटने की विफलता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

मनुष्यों का जीवन अनमोल है। आंकड़ों की बात करें तो कोई भी उसकी कीमत नहीं लगा सकता। भारत की अर्थव्यवस्था को भी दिल्ली में चिकनगुनिया और डेंगू के प्रसार का नुकसान उठना पड़ रहा है। विषाणुजनित रोगों की वजह से आने वाले सर्दियों के मौसम में यात्रा और पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही, पर्यटन से राजस्व बढ़ाने की अवधि होती है। खास तौर पर दशहरे, दिवाली और क्रिसमस की छुट्टियों में लोग बड़े पैमाने पर घूमने निकलते हैं। इस अवधि में विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में एशिया घूमने आते हैं। यह तिमाही यात्रा सेक्टर में सबसे ज्यादा राजस्व की कमाई वाली होती है।

राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर जैसे पर्यटक स्थलों पर जाने की यात्रा विदेशी सैलानी दिल्ली से ही शुरू करते हैं। भारत आने वाले कुल विदेशी पर्यटकों का 35 प्रतिशत सबसे पहले दिल्ली पहुंचते हैं। लेकिन अब दिल्ली देश ही नहीं दुनिया में भी विषाणुजनित रोगों के लिए बदनाम हो रही है। ऐसे में विदेशी पर्यटक अपनी यात्रा प्लान बदल रहे हैं। इसका नुकसान सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के पश्चिम और उत्तरी हिस्से को भी उठाना होगा।

कई ऐसे उद्योग हैं, जो पूरी तरह पर्यटन उद्योग पर आश्रित हैं। उनकी कमाई का मुख्य जरिया पर्यटक हैं। इसमें एविएशन, टैक्सी सर्विसेस, हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री भी शामिल है। इन पर भी मौजूदा हालात का प्रतिकूल असर पड़ेगा।

एसोचैम के महा सचिव डी.एस. रावत ने कहा- “चिकनगुनिया और डेंगू के केस बढ़ते जा रहे हैं। इसका पर्यटकों पर बुरा असर पड़ेगा। ट्रैफिक नीचे की ओर जाएगा। होटल, एयरलाइंस, टैक्सी ऑपरेटर्स के साथ ही रेस्त्रां का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित होगा। कई टूर ऑपरेटर एहतियातन कदम उठा रहे हैं। वे पर्यटकों को दिल्ली के बजाय कहीं ओर उतरने की सलाह दे रहे हैं। खासकर अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटक सीजन के लिए वे तैयार हो रहे हैं।”

दिल्ली के रहवासी भी अपने परिवार और दोस्तों को राष्ट्रीय राजधानी न आने की सलाह दे रहे हैं। जबकि आम तौर पर यह लोग छुट्टियों के मौसम में अपने घर या दोस्तों से मिलने दिल्ली पहुंचते हैं। लेकिन इस बार डेंगू और चिकनगुनिया की वजह से हालात खराब हो रहे हैं।

कई रहवासी शहर के बाहर नहीं जा पा रहे। इससे भी पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है। इसकी एक बड़ी वजह इन परिवारों में किसी न किसी का बीमार होना भी है।

फिल्म और मनोरंजन उद्योग को भी नुकसान होने की आशंका है। लोकेशन पर शूटिंग करते वक्त कई क्रू मेंबर्स भी बीमार हो गए हैं।
नतीजा

यह कहना जरूरी है कि दिल्ली आज पूरी दुनिया के आर्थिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन के जरिए केंद्र सरकार भी विकासशील देश की एक सकारात्मक तस्वीर पूरी दुनिया के सामने पेश कर रही है। यह जताने की कोशिश कर रही है कि देश अब विकसित होने के रास्ते पर अग्रसर है। टेक्नोलॉजी में देश आगे बढ़ रहा है। हरियाली से भरा, साफ-सुथरा और शांतिपूर्ण माहौल यहां आपको मिलेगा। ऐसे मौके पर दिल्ली का मौजूदा परिदृश्य अंतरराष्ट्रीय फोरम पर देश की अच्छी छवि प्रस्तुत नहीं करता।

राज्य सरकार को अपनी कमर कसनी होगी। जल्द से जल्द सभी अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी दिखानी होगी। दिल्ली की आबादी को यह पता होना चाहिए कि उनके सहयोग के बिना सरकार मौजूदा समस्या से नहीं निपट सकती। दिल्ली को साफ-सुथरा, हरा-भरा और प्रदूषण-मुक्त बनाना हर रहवासी का दायित्व है।